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कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीन एक्सप्रेस-वे को लेकर किसानों ने जताया विरोध, कहा-‘जान देंगे, जमीन नहीं देंगे’

Kishangarh-Kotputli Greenfield Expressway: प्रस्तावित कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीन एक्सप्रेस-वे परियोजना के विरोध में प्रभावित किसानों ने आयोजित जनसुनवाई में पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण समिति के अधिकारियों के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया।

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Rajasthan New Expressway

Photo: AI generated

कोटपूतली। प्रस्तावित कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीन एक्सप्रेस-वे परियोजना के विरोध में प्रभावित किसानों ने आयोजित जनसुनवाई में पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण समिति के अधिकारियों के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया। किसानों ने एक स्वर में 'जान देंगे, जमीन नहीं देंगे' का संकल्प दोहराते हुए कहा कि वे अपने खेतों में खड़े पेड़ों को किसी भी कीमत पर नहीं कटने देंगे और परियोजना का हर स्तर पर विरोध जारी रखेंगे।

किसानों ने कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और किसानों की उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण की तैयारी की जा रही है। उनका आरोप है कि इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचेगा और अनेक किसान भूमिहीन होने की स्थिति में पहुंच जाएंगे।

किसानों ने दी चेतावनी

उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है। जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की बात करने वाली सरकार किसानों की आजीविका और कृषि भूमि पर संकट खड़ा कर रही है। किसानों ने चेतावनी दी कि किसी भी स्थिति में सड़क निर्माण नहीं होने दिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

किसानों ने परियोजना की समीक्षा कर कृषि भूमि, पर्यावरण और ग्रामीण आबादी पर पड़ने वाले प्रभावों का पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की। अतिरिक्त जिला कलक्टर ओमप्रकाश सहारण ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी आपत्तियों और मांगों को राज्य सरकार तक पहुंचाया जाएगा। वहीं प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों ने भी किसानों की बात को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर रखने का भरोसा दिलाया।

आंदोलन को मिल रहा समर्थन

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के प्रस्तावित मार्ग से प्रभावित गांवों में पिछले कुछ समय से विरोध का स्वर लगातार मुखर हो रहा है। किसानों का कहना है कि परियोजना से कृषि भूमि, पेड़-पौधों और स्थानीय पर्यावरण पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

ऐसे में प्रभावित किसान संगठित होकर अपनी जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। जनसुनवाई में किसान महापंचायत के प्रदेश अध्यक्ष मुसद्दीलाल यादव, जिला अध्यक्ष बाबूलाल चौधरी, प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश बिजारणिया, तहसील अध्यक्ष हरसहाय तंवर सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।