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स्मृति में… व्यक्ति के गुणों की पहचान कर आगे बढ़ाते थे कुलिशजी

राजस्थान की धड़कनों में कुलिशजी

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राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी

Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year: राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार प्रवीणचंद्र छाबड़ा से हाल ही में एक कार्यक्रम में हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने मेरे पिता बिशन सिंह शेखावत के 1977 में राजस्थान पत्रिका से जुड़ने के समय की बातें साझा कीं। छाबड़ा जी ने बताया कि उस दौरान चर्चाएं होने लगी कि बिशनसिंह शेखावत निश्चित रूप से न केवल राजस्थान पत्रिका वरन राजस्थान के सारे पत्रकारों और समाचार पत्रों में काम करने वाले श्रमिकों का संगठन बना देंगे, जैसा उन्होंने राजस्थान में शिक्षकों और राज्य कर्मचारियों के लिए कर्मचारी महासंघ के रूप में बनाया।

कुलिशजी के पास जब ये चर्चाएं पहुंचीं तो कुलिशजी ने कहा कि मैं बिशन जी को 45 वर्षों से उस समय से जानता हूं जब वे लालकृष्ण आडवाणी के साथ जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित नानाजी की हवेली में रहा करते थे। पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह भी उस समय तक राजनीति में नहीं आए थे। कुलिश जी ने कहा मैंने बिशनसिंह के समर्पित एवं ईमानदार संघर्ष को देखा है। वे जुड़ेगे तो पत्रिका का वास्तविक स्वरूप आम जनमानस में निखर के आएगा। मेरे पिता बिशनसिंह की 65 वर्ष की आयु में मृत्यु के समाचार से कुलिशजी बहुत दुखी हुए और 11 अक्टूबर 1996 को उन्होंने पत्रिका में प्रकाशित एक आलेख में मेरे पिता को श्रद्धांजलि व्यक्त की थी।

डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत,
अध्यक्ष, बिशन सिंह शेखावत शोध एवं शिक्षण संस्थान राजस्थान

अविस्मरणीय पल

जयपुर के ज्वैलर (जयपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव) अजय काला ने जनवरी 2006 में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी को लिखे पत्र में कुलिशजी को पत्रकारिता का वटवृक्ष बताते हुए याद किया था।

उन्होंने बताया कि 1995 के एक समारोह में कुलिशजी के समक्ष मैंने कहा था, "100 वर्ष पश्चात बहुत से लोग इस बात का यकीन नहीं करेंगे कि आप जैसा इंसान इस धरती पर आया था।" काला ने पत्र में उनके असीम योगदान, मानवीय मूल्यों और प्रेरक व्यक्तित्व को गहराई से रेखांकित किया। कुलिशजी का संस्मरण और उनके साथ मुलाकात की दुर्लभ तस्वीर काला ने हाल ही पत्रिका के साथ साझा की।