27 मार्च 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year: राजस्थान की धड़कनों में कुलिशजी; सत्य, निष्पक्षता और जनहित के प्रतीक थे कुलिशजी

Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year: भारतीय पत्रकारिता के परिदृश्य में श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश ऐसा युगप्रवर्तक नाम है, जो केवल अपने समय तक सीमित नहीं, बल्कि एक विचार, एक परंपरा और एक जीवंत चेतना के रूप में स्थापित है।

2 min read
Google source verification
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी

Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year: भारतीय पत्रकारिता के परिदृश्य में श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश ऐसा युगप्रवर्तक नाम है, जो केवल अपने समय तक सीमित नहीं, बल्कि एक विचार, एक परंपरा और एक जीवंत चेतना के रूप में स्थापित है।
आज जब मीडिया जगत 'ब्रेकिंग न्यूज', टीआरपी और विज्ञापन-प्रेरित प्राथमिकताओं के दबाव में दिशाहीन प्रतीत होता है, तब पत्रिका की यात्रा महत्वपूर्ण हो जाती है। यह एक अखबार की नहीं, उन मूल्यों की सतत साधना है, जिन्हें कुलिशजी ने संस्थान में प्रतिष्ठित किया।

पत्रिका परिवार के रूप में जोड़ता है:

कुलिशजी ने पत्रिका को कॉर्पोरेट ढांचे में नहीं, परिवार के रूप में विकसित किया। 'बाउजी', 'बड़े भैया साहब','बाबू' जैसे आत्मीय संबोधन संगठन को जोड़ते रहे।

कुलिश सिद्धांतः आचरण में जीवित दर्शन

सत्य सर्वोच्च है, विश्वास ही पूंजी है, संबंधों में आत्मीयता है, नैतिक अर्थव्यवस्था है और समाधान दृष्टि है।

'निष्ठा खरीदी नहीं जाती वह अर्जित होती है'

पत्रिका ने इस सिद्धांत को व्यवहार में उतारा। अन्य संस्थान 'पैकेज' से आकर्षित करते हैं, जबकि पत्रिका उद्देश्य, सम्मान और आत्मीयता से जोड़ता है।

मूल्यों की 'हॉर्स-रेस' नहीं, स्थायित्व की साधना :

वर्तमान मीडिया परिदृश्य में जहां वैचारिक झुकाव और पूर्व निर्धारित एजेंडा दिखते हैं, वहां पत्रिका मूल्यों का संवर्धन, विश्वास और अपनत्व पर आधारित मॉडल प्रस्तुत करता है।

युवाओं को सफलता नहीं, दिशा और संस्कार:

पत्रिका ने युवाओं को केवल सफलता के सूत्र नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, नैतिकता, विवेक, चरित्र निर्माण और स्थानीय अस्मिता का संतुलन दिया।

महिला सहभागिता से नेतृत्व तक

कुलिशजी की पत्रकारिता में समावेशिता मूल तत्व थी। पत्रिका महिलाओं को केवल विषय नहीं, बल्कि परिवर्तन की सक्रिय शक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है।

शासन के लिए दर्पण और दिशा

पत्रिका सरकार की उपलब्धियों को निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत करता है, जनसमस्याओं को निर्भीकता से उठाता है और प्रश्न पूछने की परंपरा को जीवित रखा है।

आज के संदर्भ में पत्रिका की प्रासंगिकता:

सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर पत्रिका संवाद, संतुलन, विश्वास-आधारित मॉडल और निष्पक्ष आवाज के रूप में उभरता है।

परंपरा से भविष्य तकः

कुलिशजी ने एक अखबार नहीं, एक जीवंत परंपरा का निर्माण किया। 'विश्वास कमाया जाता है, खरीदा नहीं जाता।' यही धरोहर आज भी हर पंक्ति में जीवित है।

प्रेषकः मुकुल गोस्वामी, राकेश जैन
(श्रद्धेय कुलिशजी का आत्मकथ्य "धाराप्रवाह" आप दोनों के साक्षात्कार पर आधारित है।।

बड़ी खबरें

View All

जयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग

कर्पूर चंद्र कुलिश जन्मशती वर्ष