
छत्तीसगढ़ में बनेगा लमेरु एलीफेंट रिजर्व
छत्तीसगढ़ में बनेगा लमेरु एलीफेंट रिजर्व
- छत्तीसगढ़ में बनेगा लमेरु हाथी रिजर्व
- लमेरु रिजर्व पर 2007 में बनी सहमति
- 2011 में बना सरगुजा-जशपुर हाथी रिजर्व
- लमेरु का क्षेत्रफल 1995.48 वर्ग किमी
- 18.92 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादि
- हाथियों के संरक्षण को मिलेगी गति
- फसल का नुकसान रुकेगा
- हाथी संरक्षण के साथ फसल सुरक्षा
ग्राफिक्स
45 हजार हाथी विश्व में जीवित
27 हजार हाथी भारत में रहते
कर्नाटक में सबसे ज्यादा हाथी
2012 में हुई थी हाथियों की गणना
254 हाथी छत्तीसगढ़ राज्य में
5 साल में संघर्ष में 65 लोगों की मौत
104 हाथी हर साल होते हैं शिकार
1989 में हाथी दांत के व्यापार बैन
छत्तीसगढ़ में हाथी और इंसानों का संघर्ष बड़ा चुनौती बना हुआ है। हर साल इंसान और हाथी दोनों के बीच होने वाले संघर्ष में दोनों की जान तो जाती ही है। साथ में संपत्ति और फसलों का भी भारी नुकसान होता है। इस संघर्ष को रोकने के साथ हाथी संरक्षण और संवर्धन के लिए लमेरु हाथी रिजर्व बनाया जा रहा है। भारत सरकार ने इस रिजर्व की अनुमति वर्ष 2007 में ही दे दी थी। अब उस पर अमल होने जा रहा है।
छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में से एक है, जिसकी पहचान वनाच्छादित क्षेत्र के कारण है। यहां लगभग 18.92 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है। वहीं वन्य प्राणियों के लिए संरक्षित क्षेत्र 8.36 प्रतिशत है। वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए दो राष्ट्रीय उद्यान, तीन टाइगर रिजर्व, आठ अभयारण्य और एक बायोस्फियर रिजर्व है। इसके बावजूद यहां हाथियों का उत्पात आम आदमी की जिंदगी पर असर डाल रहा है। अब यहां लमेरु हाथी रिजर्व बनाने की तैयारी तेज हो गई है। भारत सरकार ने वर्ष 2007 में लमेरु हाथी रिजर्व बनाए जाने पर सहमति जताई थी। वर्ष 2011 में तीन अभ्यारण्य पिंगला, सेमरसोत और बादलखोल को मिलाकर सरगुजा-जशपुर हाथी रिजर्व बना दिया गया। लमेरु हाथी रिजर्व का क्षेत्रफल 1995.48 किलोमीटर था, वहीं सरगुजा-जशपुर हाथी रिजर्व 1143.34 वर्ग किलोमीटर में है। छत्तीसगढ़ जब मध्य प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था। उस दौर में वर्ष 1988 से दूसरे राज्यों से हाथियों के आने का सिलसिला शुरू हुआ था। धीरे-धीरे हाथियों की संख्या बढ़ती गई। वर्तमान में राज्य में 254 से ज्यादा हाथी विचरण कर रहे हैं। ये हाथी 19 झुडों में राज्य के सरगुजा, बिलासपुर व रायपुर वन क्षेत्र में नजर आ जाते हैं। बीते पांच सालों में हाथी और मानव में कई बार संघर्ष हुआ। परिणामस्वरूप दोनों की जानें भी गईं, तो दूसरी ओर फसलों, संपत्ति का भी बहुत नुकसान हुआ है। वन्यप्राणी विषेषज्ञों का मानना है कि अगर हाथी रिजर्व बन जाता है तो इससे एक तरफ हाथी-मानव संघर्ष कम होगा। नुकसान को बचाया जा सकेगा। दूसरी ओर पर्यटन की संभावनाएं बढऩे पर लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकेंगे। प्रस्तावित लमेरु हाथी रिजर्व कोरबा, कटघोरा, सरगुजा और धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में 1995.48 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा।
Updated on:
18 Sept 2019 07:30 pm
Published on:
18 Sept 2019 07:30 pm
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