दिल्ली में लोकसभा चुनाव हार पर मंथन शुरू, किसी ने बताया गुटबाजी तो कोई बोला भीतरघात से हुए पस्त

दिल्ली में लोकसभा चुनाव हार पर मंथन शुरू, किसी ने बताया गुटबाजी तो कोई बोला भीतरघात से हुए पस्त

Pushpendra Singh Shekhawat | Publish: Jun, 18 2019 07:30:00 AM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

स्थानीय नेताओं ने नहीं दिया साथ, भितरघात भी हुई

सुनील सिंह सिसोदिया / जयपुर। राज्य में लोकसभा की सभी 25 सीटें हारने का कारण पार्टी उम्मीदवारों ने गुटबाजी और स्थानीय नेताओं के साथ नहीं देने को बताया है। वहीं कुछ मंत्री और विधायकों के भितरघात करने की शिकायतें भी की गई। लोकसभा चुनाव परिणामों के एक माह बाद कांग्रेस ने हार के कारण खोजने को लेकर सोमवार से मंथन शुरू कर दिया है। दिल्ली में उम्मीदवारों को बुलाकर एक-एक से अलग-अलग फीडबैक लिया गया। इस दौरान प्रदेश प्रभारी अविनाश पाण्डे और प्रभारी सचिवों ने हार के कारण पूछने के साथ ही सभी को लिखित में रिपोर्ट देने के लिए भी कहा।

 

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की जयपुर से उम्मीदवार ज्योति खण्डेलवाल ने कुछ दिनों पहले सार्वजनिक रूप से मीडिया में हार के जो कारण बताए थे। वही लगभग अधिकांश उम्मीदवारों ने दिल्ली में प्रदेश प्रभारी को बताए। बताया जा रहा है कि हार के लिए अधिकांश उम्मीदवारों ने प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गुटबाजी को अहम कारण बताया। इसके साथ ही क्षेत्रीय नेताओं व कुछ विधायकों के साथ नहीं देने को भी हार के प्रमुख कारण बताया।

 

मंथन में सामने आया है कि जिला स्तर पर संगठन के पदाधिकारियों के साथ समन्वय की कमी और पूरी ताकत के साथ नहीं जुटने से पार्टी को नुकसान पहुंचा। जबकि भाजपा ने पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ा। इसकी वजह से सभी सीटों पर कांग्रेस मुकाबले में पिछड़ गई। पहले दिन करीब 11 उम्मीदवारों से लोकसभा चुनाव को लेकर फीडबैक लिया गया। शेष उम्मीवारों से मंगलवार को चर्चा होगी। मंथन में यह भी सामने आया है कि राज्य की कांग्रेस सरकार के कामों को भी लोगों तक पहुंचाने में पार्टी विफल रही। कई नेताओं ने पार्टी के खिलाफ भी काम किया।

 

बताया जा रहा है कि एक उम्मीदवार ने तो निर्दलीय विधायकों को ज्यादा महत्व नहीं देने तक का सुझाव दे दिया। कहा गया कि निर्दलीय सरकार में अपने सभी काम करा रहे हैं। लेकिन पार्टी के खिलाफ काम करने, चुनाव लडऩे के साथ ही आगे किसके साथ जाएंगे, यह भी विश्वास नहीं किया जा सकता। पार्टी के एक वरिष्ठ उम्मीदवार ने इस चर्चा के बाद यहां तक कह दिया कि इस मंथन का कोई मतलब नहीं है। कुछ दमवाली बात देखने को नहीं मिली, खानापूर्ति ज्यादा लगी।

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