
मौसम के साथ भगवान की बदली दिनचर्या, जाने गोविंद देवजी मंदिर आरती का समय
हर्षित जैन /जयपुर. मार्गशीर्ष शुक्ल आरंभ के साथ ही मौसम में ठंडक का एहसास होने लगा। मंदिरों में ठाकुर जी की नित्य सेवा और भोग में बदलाव भी हो गया है। भगवान के शृंगार, भोग से लेकर आरती और शयन तक की दिनचर्या में पूरी तरह से बदल गई है। भगवान को गर्म पानी से स्नान करवाया जा रहा है। साथ ही रजाई और सिगड़ी अलावा की सेवा रखी जा रही है। कुछ मंदिरों में प्रभु की यह दिनचर्या शुरू हो गई है वहीं व्यंजना द्वादशी पर भोग सेवा में पूर्ण रूप से परिवर्तन कर दिया जाएगा।
शयन झांकी रात 8.15 बजे
गोविंददेवजी मंदिर के प्रबंधक मानस गोस्वामी ने बताया कि शयन झांकी में मखमली रुई से तैयार विशेष पोशाक धारण करवाई जा रही है। पंचामृत अभिषेक के बाद जामा पोशाक धारण करवाई जा रही है। इसी प्रकार भोग के व्यंजनों में भी गर्म तासीर वाले भोज्य पदार्थ शाामिल किए जा रहे हैं।
बड़ी चौपड़ स्थित लक्ष्मीनारायण बाईजी मंदिर के महंत पुरुषोत्तम भारती ने बताया कि ठाकुरजी को शॉल और कंबल ओढ़ाई जा रही है। पानों का दरीबा स्थित सरस निकुंज में ठाकुर राधा सरस बिहारी की नित्य सेवा में परिवर्तन किया। विशेष पकवान का भोग लगाया जा रहा है। राधा दामोदर मंदिर में गर्भगृह को गर्म रखने के लिए सिगड़ी का सहारा लिया जाएगा।
गोनेर स्थित लक्ष्मीजगदीश मंदिर, स्वामीनारायण अक्षर धाम मंदिर, इस्कॉन मंदिर, अक्षयपात्र मंदिर में भी झांकियों के समय में बदलाव किया है। मंदिर के समन्वयक सिद्धस्वरूपा दास ने बताया कि आगामी दिनों में शॉल और कंबल भी भगवान को ओढ़ाया जाएगा। ज्यूस आदि के बजाय गरम पकवानों का भोग लगाया जा रहा है। इस्कॉन मंदिर में भगवान को हलवे का भोग लगाया जा रहा है।
यह हो रहा बदलाव
इस दौरान भगवान को गर्म तासीर वाली वस्तुओं का भोग लगाया जा रहा है। जिसमें ऋतुफलों के साथ गरम जलेबी, खीर, हलवा तिल के लड्डू आदि का भोग लगाया जा रहा है। गहरे रंग के मोटे और विशेष रूई से बने वस्त्र धारण करवाए जा रहे हैं। शयन में शॉल और रजाई भी भगवान को पहनाई जा रही है।
Published on:
02 Dec 2019 07:10 am
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