
पेयजल त्रासदी में अपनों को हमेशा के लिए खोने वाले लोगों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे. Photo- Patrika
Indore Water Contamination: देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल करने वाले इंदौर में दूषित पानी पीने के कारण उल्टी-दस्त से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 16 तक पहुंच गया है। अस्पतालों में भर्ती 208 मरीजों में से 27 ICU में हैं, वहीं एक वेंटिलेटर पर जीवन व मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है, स्थिति इतनी गंभीर है कि अधिकांश परिवार अपने बीमार परिजनों की देखभाल के लिए घरों से बाहर हैं। पेयजल त्रासदी में अपनों को हमेशा के लिए खोने वाले लोगों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।
कभी न मिटने वाला ये दर्द साधना साहू को भी मिला है, जिन्होंने अपने 6 माह के इकलौटे बेटे को खो दिया। घटना को याद करते हुए आंखों में आंसू और भरे गले से साधना केवल इतना बोल पाई कि पानी दूषित था। मैंने अव्यान के दूध में मिला दिया और उसकी सांसें टूट गईं।
घटना के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने एक्शन लेते हुए नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को हटा दिया है वहीं अपर आयुक्त रोहित सिनोनिया और जल कार्य शाखा के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया। 3 आइएएस अधिकारियों को इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त के रूप में तैनात किया गया है।
यह घटना केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। राजस्थान के शहरों, कस्बों और गांवों में भी लोगों को पीने लायक पानी नहीं मिल रहा। आए दिन नलों में गंदा और बदबूदार पानी आने के मामले सामने आते रहते हैं। मजबूरन लोगों को मुंह मांगी कीमत पर टैंकर खरीदने पड़ रहे हैं।
वर्ष 2008 और 2009 में राजस्थान की राजधानी जयपुर के शास्त्रीनगर के कांवटिया अस्पताल क्षेत्र, परकोटा में हीदा की मोरी में लक्ष्मीनारायणपुरी और मुरलीपुरा समेत कई इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई से 7 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। 2010-2011 में सांगानेर की सुभाष कॉलोनी में दूषित जलापूर्ति के कारण कई लोग हुए बीमार हो गए थे।
जुलाई 2018 में जयपुर के मेहनत नगर हटवाड़ा क्षेत्र में गंदे पानी की सप्लाई का मामला सामने आया था। दर्जनों घरों में नलों से दूषित पानी की आपूर्ति हुई, जिससे क्षेत्र में दहशत फैल गई। दूषित पानी के सेवन से कई लोग बीमार पड़ गए। उन्हें उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा था।
मामला सामने आने के बाद जलदाय विभाग ने जांच कराई और क्षेत्र में नई डीआई (डक्टाइल आयरन) पाइपलाइन बिछाने का कार्य कराया। इसके बाद इलाके में जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार हुआ। जयपुर शहर में जुलाई 2022 में गलता गेट इलाके में भी दूषित पानी सप्लाई होने से बाशिंदे बीमार हो गए थे, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
जलदाय विभाग ने समय रहते समस्या का समाधान कर लिया, जिसके कारण कोई बड़ी अनहोनी नहीं हो सकी। बीते 7 साल में जयपुर में परकोटा की सभी चौकड़ियों में 30 से 40 साल पुरानी पानी की पाइप लाइनों की जगह डीआई पाइपलाइन बिछाने का काम हुआ।
स्मार्ट सिटी स्कीम समेत अन्य मदों में करीब 250 किमी से ज्यादा लंबाई की नई पाइप लाइनें बिछाई जाने से अब जयपुर के परकोटा क्षेत्र में दूषित जलापूर्ति की शिकायतें नगण्य रह गई हैं। चौकड़ी मोदी खाना और चौकड़ी विश्वेश्वर वो इलाके हैं, जहां पाइप लाइन सबसे पहले बदली गई।
ब्यूरो ऑफ इण्डियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) और इण्डियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के मुताबिक पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.0 पीपीएम से अधिक हो तो वह पीने लायक नहीं रहता। इन मानकों के आधार पर राजस्थान के काफी जिलों में पानी पीने लायक नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक टीडीएस युक्त पानी के लगातार सेवन से पेट संबंधी रोग, किडनी पर असर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
जयपुर स्थित स्टेट रेफरल सेंटर लेबोरेट्री में वर्ष 2019 से पानी के सैंपलों में पेस्टिसाइड की जांच शुरू हुई। लैब में पानी सैंपल की बेक्टोलॉजिकल और केमिकल जांच पहले से हो रही है। वर्ष 2018 में विभाग के पूर्व प्रमुख शासन सचिव ने लैब में जांच के लिए जमा होने वाले पानी सैंपलों पर बार कोडिंग करने के निर्देश दिए थे, लेकिन यह व्यवस्था अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
राजस्थान के 20 जिलों में राज्य सरकार ने वर्ष 2020 से पानी की गुणवत्ता जांच के लिए मोबाइल वाटर टेस्टिंग लेबोरेट्री का संचालन शुरू किया था। ग्रामीण इलाकों के लोगों को घर बैठे ही पानी की गुणवत्ता जांच की रिपोर्ट भी मिलना शुरू हुई। इसके अलावा जिलों में ब्लॉक लेवल वाटर टेस्टिंग लेबोरेट्री खोलने का भी निर्णय लिया गया।
वर्तमान में दूषित पानी का एक बड़ा खतरा प्रदेश में सामने आ रहा है। प्रदेश में गंदे पानी (फैक्ट्रियों के पानी और सीवर के पानी) से खेतों में सिंचाई की जा रही है।
राजधानी जयपुर में भी सबकी आंखों के सामने धड़ल्ले से सांगानेर और जगतपुरा समेत कई क्षेत्रों में नालों के गंदे और केमिकल युक्त पानी से सिंचाई की जा रही है।
इस गंदे पानी से जो सब्जियां और फसलें तैयार हो रही हैं, उनको शहर में भेजा रहा है। पत्रिका भी कई बार इस मामले को उठा चुका है, लेकिन जिम्मेदार आंख मूंदे बैठे हैं।
Updated on:
03 Jan 2026 06:35 pm
Published on:
03 Jan 2026 06:03 pm
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