
जयपुर। जल्द ही लोगों को एक ऐसा पोर्टेबल टेस्टर मुहैया होगा, जो दूध में मिलावट को आसानी से बस एक मिनट में जांच कर बता देगा। यह डिवाइस तैयार की है राजस्थान सरकार की एक शोध संस्था ने।
पिलानी स्थित सेंट्रल इलेक्टॉनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीरी) यह तकनीक उन निर्माता कंपनियों को सौंपने वाली है, जो इसका व्यापक पैमाने पर उत्पादन करेंगी।
बीते 26 सितंबर को नई दिल्ली में वैज्ञानिक और औद्योगिक शोध संस्थान की स्थापना दिवस के मौके पर यह तकनीक राष्ट्र को सौंपी है। यह डिवाइस दूध में मिलाए जाने वाले यूरिया, नमक, डिटर्जेंट, बोरिक एसिड और कॉस्टिक सोडा जैसे पदार्थों को महज 60 सेकेंड में ही बता देगी।
राजस्थान के दूध प्रसंस्करण और पैकेजिंग निकाय राजस्थान कोऑपरेटिव डेरी फेडरेशन के मुताबिक, राज्य में रोजाना 4.5 करोड़ किग्रा दूध का उत्पादन होता है। इनमें से तकरीबन 40 फीसदी दूध गाय का होता है। कुल उत्पादन का 2.27 करोड़ किग्रा दूध डेयरी और दूधवालों के जरिए बेच दिया जाता है।
5000 रुपए की लागत
पंचारिया के मुताबिक, एक डिवाइस बनाने में करीब 5000 रुपए की लागत आएगी। मगर माना जा रहा है कि जब इसका व्यावसायिक उत्पादन होने लगेगा तो आम लोगों को यह कम कीमत पर ही मुहैया हो जाएगी।
400 से ज्यादा डेयरी में हो रहा इस्तेमाल
फिलहाल यह डिवाइस अभी औद्योगिक इस्तेमाल के लिए विकसित की गई है। इसे देशभर के 400 से ज्यादा डेयरी में इस्तेमाल किया जा रहा है।
जयपुर में एक लाख का है स्कैनर
जयपुर स्थित राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड (आरईआईएल) व्यावसायिक तौर पर स्कैनर का उत्पादन कर रही है। इसकी कीमत एक लाख रुपए बताई जा रही है।
सीरी की तकनीक ऐसे करेगा काम
सीरी के डॉ. पीसी पंचारिया ने बताया जांच के लिए 3 मिली दूध में 10 मिली पानी, एक बायोकेमिकल कैप्सूल मिलाना होगा। 1 मिनट बाद ओके बटन को दबाने पर रिजल्ट मिलेगा।
सिंथेटिक दूध व उसके नुकसान
विशेषज्ञों के मुताबिक, यूरिया, डिटर्जेंट और शैंपू का इस्तेमाल सिंथेटिक दूध बनाने में किया जाता है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इस तरह के दूध को गाढ़ा करने और क्रीमी बनाने के लिए स्टार्च भी मिलाया जाता है।
Published on:
01 Oct 2017 10:43 am
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