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बच्चों के पोषाहार में बड़ी भूल- दो सौ करोड़ का बजट, फिर भी बच्चे पीएंगे फीका ‘दूध‘!

बजट आंवटित, चीनी शामिल करना भूले...
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जयपुर

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Dinesh Saini

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Updated: 8 Jun 2018, 10:54 AM IST

Mid Day Milk

जयपुर। शिक्षा विभाग प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के 64 लाख बच्चों को पोषाहार में अब दूध बांटने की भी तैयारी कर रहा है। इसके लिए करीब दो सौ करोड़ का बजट भी जारी कर दिया। इसमें दूध, गर्म करने के बर्तन, वितरण के लिए गिलास सभी को शामिल किया, चीनी को शामिल करना भूल गए। ऐसे में यदि कोई नया संशोधन नहीं होगा तो बच्चों को फीका दूध भी पीना पड़ सकता है।

2 जुलाई से होगी दूध की शुरुआत
स्कूलों में मिड-डे मिल में दूध की शुरुआत 2 जुलाई से होगी। बच्चों को सप्ताह में तीन बार दूध पोषाहार दिया जाएगा। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री व जिलास्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि इसकी शुरुआत करेंगे। दूध के लिए विभाग ने शहर में 40 रुपए प्रति लीटर व गांव में 35 रुपए प्रति लीटर दर तय की है। मुख्यमंत्री ने इसी साल फरवरी में राज्य विधानसभा में पेश बजट में मिड डे मील योजना में बच्चों को दूध भी उपलब्ध कराने की घोषणा की।


बर्तनों के लिए 2500 रुपए आवंटित
विभाग ने दूध गर्म करने के लिए स्टील का भगोना, टंकी, जग, पलटा आदि खरीदने को 2500 रु. तक बजट आवंटित किया है। आमतौर पर चीनी मिलाकर ही दूध पिया जाता है। दिशा-निर्देशों में दूध कहां से मिलेगा इसका तो जिक्र है,मगर चीनी के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। छोटे बच्चों में स्कूल के प्रति आकर्षण बढ़ाने व बच्चों के शत प्रतिशत ठहराव की उम्मीद से मिड डे मील में दूध को शामिल किया गया। अब सवाल यह है कि फीका दूध इन बच्चों को कैसे और कितना आकर्षित कर पाएगा।

यहां मिलेगा दूध
मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत दो जुलाई से अन्नपूर्णा दूध योजना शुरू की जाएगी। इसके तहत समस्त प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों, मदरसों, स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर्स के कक्षा एक से आठ तक पढऩे वाले बच्चों को सप्ताह में तीन दिन उच्च गुणवत्ता युक्त गर्म व ताजा दूध पिलाया जाएगा। यह दूध प्रार्थना सभा के तुरंत बाद उपलब्ध करवाया जाएगा।

- कई जगह गर्म दूध अपने आप मीठा होता है। जहां आवश्यकता होगी, वहां एसएमसी से व्यवस्था करेंगे।
वासुदेव देवनानी, शिक्षा राज्यमंत्री