25 मार्च 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान में काम कर रहे लाखों बंगाली अचानक ‘पलायन’ को मजबूर, जानते हैं क्या है बड़ी वजह?  

पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों की गूंज मरुधरा में काम कर रहे लाखों प्रवासियों के चेहरों पर साफ देखी जा सकती है। यह हलचल केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने राजस्थान के व्यापार, परिवहन और आम जनजीवन को भी गहराई से प्रभावित किया है। 'पत्रिका पड़ताल' में सामने आया है कि किस तरह वोट की चोट का डर और सरकारी योजनाओं का मोह राजस्थान से बंगाल तक के सफर को मजबूर कर रहा है।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Nakul Devarshi

image

सुनील सिंह सिसोदिया

Mar 25, 2026

सुनील सिंह सिसोदिया/ जयपुर। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भले ही राजस्थान से करीब दो हजार किलोमीटर दूर हो रहे हों, लेकिन इसका असर राजधानी जयपुर सहित प्रदेशभर में काम कर रहे पश्चिम बंगाल के लोगों पर साफ दिखने लगा है। वोट के लिए घर लौटने का दबाव, वोटर लिस्ट से नाम कटने का डर और मुफ्त योजनाओं का आकर्षण, इन कारणों से लोगों की दिनचर्या बदल गई है।

सूत्रों के अनुसार, गांवों से लगातार संदेश मिल रहे हैं कि मतदान नहीं किया तो वोटर सूची से नाम हटाया जा सकता है और सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर सरपंच और प्रधानों के जरिए निगरानी की बात भी सामने आ रही है। इसी कारण जयपुर में काम कर रहे लोग हर हाल में मतदान के लिए घर जाने को मजबूर हो रहे हैं।

मानसरोवर निवासी सुकांत के अनुसार, गांवों से साफ संदेश मिल रहे हैं कि वोट देना जरूरी है, वरना योजनाओं का लाभ बंद हो सकता है। परिवारों पर स्थानीय नेताओं का दबाव भी बताया जा रहा है।

टिकट के लिए जंग, किराया कई गुना

जयपुर से गुवाहाटी और कटक जाने वाली ट्रेनों में टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। सामान्य किराया चार-पांच गुना तक बढ़ गया है, फिर भी सीटें उपलब्ध नहीं हैं।

बसों का भी यही हाल है। जहां आमतौर पर किराया करीब 2 हजार रुपये था, वहीं अब 4 से 5 हजार रुपये देने के बाद भी सीट नहीं मिल रही। निजी बसों में बुकिंग तेज है और 30-36 सीट वाली बसों में 70 से अधिक यात्रियों को बैठाने की बात पहले ही बता दी जा रही है, जिससे बाद में कोई विवाद न हो।

उद्योग-धंधों पर असर, छुट्टियों का संकट

जयपुर सहित प्रदेशभर में फैक्ट्रियों, शोरूम, होटलों और घरों में बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल के लोग कार्यरत हैं। एक साथ बड़ी संख्या में इनके छुट्टी पर जाने से कई छोटे उद्योगों में काम ठप पड़ने की स्थिति बन रही है।

वहीं, घरेलू सहायकों की 15-20 दिन की छुट्टी मांगने से परिवारों की परेशानी बढ़ गई है।

किन योजनाओं पर लोगों का आकर्षण

  • मुफ्त स्वास्थ्य बीमा और किसान सहायता
  • स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड व दिव्यांग पेंशन योजना
  • लक्ष्मी भंडार: महिलाओं को 18,000 से 20,400 रुपये सालाना
  • युवा साथी योजना: 1500 रुपये प्रतिमाह
  • ग्रामीण आवास योजना: 1.20 लाख रुपये तक सहायता

परिणाम से पहले लौटने की जल्दबाजी

मतदान के बाद अधिकतर लोग परिणाम आने से पहले लौटना चाहते हैं। इसकी वजह परिणाम के बाद संभावित तनाव और हिंसा का डर है।

कई लोगों का कहना है कि अगर समय पर नहीं लौटे तो महीनों तक फंसने की आशंका रहती है। कई लोगों को जाने का टिकट मिल रहा है, लेकिन लौटने का नहीं, जिससे वे बच्चों को यहीं छोड़कर जाने को मजबूर हैं। इसी कारण वे जल्दी से जल्दी वापस लौटना चाहते हैं।

बड़ी खबरें

View All

जयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग