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Rajasthan: ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ पर फंसा पेंच? आयोग को मंत्री खर्रा ने दिया कड़ा जवाब; कर दिया ये ऐलान

Rajasthan Politics: राजस्थान सरकार ने निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने घोषणा की कि राज्य सरकार दिसंबर 2025 तक चुनाव कराने की पूरी तैयारी कर रही है।

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(राजस्थान पत्रिका फाइल फोटो)

Rajasthan Politics: राजस्थान सरकार ने निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। पंचायती राज और स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि राज्य सरकार दिसंबर 2025 में निकाय और पंचायत चुनाव कराने की पूरी तैयारी कर रही है।

इसके साथ ही, सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की तर्ज पर इन चुनावों को एक साथ कराने की दिशा में कदम उठा रही है। मंत्री खर्रा ने कहा कि हाईकोर्ट के हालिया निर्देशों का अध्ययन किया जा रहा है और विधिक राय के आधार पर जल्द ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

हाईकोर्ट की सख्ती का असर?

बता दें, हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में देरी को लेकर सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। जस्टिस अनूप ढंड की अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद-243ई और राजस्थान पंचायती राज अधिनियम की धारा-17 के तहत पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए।

कोर्ट ने परिसीमन के बहाने चुनाव टालने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे स्थानीय शासन में रिक्तता पैदा होती है, जिसका सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कोर्ट ने सरकार को जल्द से जल्द चुनाव कराने और बिना उचित प्रक्रिया के निलंबित किए गए पंचायत प्रशासकों को बहाल करने के निर्देश दिए।

‘वन नेशन वन इलेक्शन’ पर रार?

राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने मंगलवार को कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद आयोग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोर्ट के आदेशों की पालना में जल्द ही चुनाव कार्यक्रम जारी किया जाएगा। गुप्ता ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश हमें प्राप्त हो चुका है। अब हमारे पास जल्द चुनाव कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

हालांकि, उन्होंने ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि इसके लिए संवैधानिक संशोधन की जरूरत है, जो अभी संभव नहीं है।

यहां देखें वीडियो-


इसके उलट, मंत्री खर्रा ने बताया कि सितंबर में राज्य निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची तैयार करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके साथ ही, अक्टूबर-नवंबर में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आने की उम्मीद है, जिसके बाद परिसीमन और अन्य प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। उन्होंने कहा कि हमारी मंशा साफ है, हम वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत सभी निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने को प्रतिबद्ध हैं।

निर्वाचन आयोग के बयानों पर सवाल

मंत्री खर्रा ने राज्य निर्वाचन आयोग के दो परस्पर विरोधी बयानों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आयोग ने पहले तीन दिन में चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन बाद में तीन महीने की समयसीमा का जिक्र किया। खर्रा ने कहा कि सरकार विधिक राय लेगी और इसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इस दौरान मंत्री खर्रा ने विपक्षी दल कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को विकास कार्यों से दिक्कत है और उसे “किसी वैद्य या हकीम से इलाज करवाना चाहिए। खर्रा ने दावा किया कि सरकार विकास के लिए प्रतिबद्ध है और चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह की देरी नहीं होने दी जाएगी।

6,759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा

बताते चलें कि प्रदेश की 6,759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल जनवरी 2025 में समाप्त हो चुका था। इसके बाद सरकार ने पूर्व सरपंचों को प्रशासक नियुक्त किया था, लेकिन भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोपों में कई प्रशासकों को हटा दिया गया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव हर पांच साल में कराना अनिवार्य है और विशेष परिस्थितियों में इसे अधिकतम छह महीने तक टाला जा सकता है।


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