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अवैध खनन पर मोनेटरिंग व्यवस्था चाकचोबंद, 91 प्रतिशत मामलों में कार्रवाई पूरी

राज्य सरकार ने प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण गतिविधियों में विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट्स पर समयवद्ध अनुसंधान कार्यवाही की मोनेटरिंग व्यवस्था को चाकचोबंद किया है।

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अवैध खनन पर मोनेटरिंग व्यवस्था चाकचोबंद, 91 प्रतिशत मामलों में कार्रवाई पूरी

अवैध खनन पर मोनेटरिंग व्यवस्था चाकचोबंद, 91 प्रतिशत मामलों में कार्रवाई पूरी

राज्य सरकार ने प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण गतिविधियों में विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट्स पर समयवद्ध अनुसंधान कार्यवाही की मोनेटरिंग व्यवस्था को चाकचोबंद किया है। प्रदेश में अवैध खनन गतिविधियों में दर्ज प्रकरणों में से करीब 91 प्रतिशत प्रकरणों में सक्षम न्यायालयों में चालान पेश कर दिया गया है। अवैध खनन संयुक्त जांच अभियान के दौरान माइंस, पुलिस व वन विभाग द्वारा राज्य में पुलिस थानों में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट पर त्वरित कार्यवाही के लिए पहलीबार विभागीय मोनटरिंग सिस्टम को मजबूत करने के साथ ही पुलिस एवं माइंस विभाग के बीच परस्पर समन्वय व सहयोग के लिए वरिष्ठ अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

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प्रदेश में 3256 एफआईआर दर्ज

अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस, पेट्रोलियम एवं जलदाय डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश में दर्ज 3256 प्रथम सूचना रिपोर्ट में से 2956 प्रकरणों में अनुसंधान पूरा कराकर संबंधित पुलिस थानों द्वारा सक्षम न्यायालयों मेें चालान पेश कर दिया गया है। 3256 में से मात्र 82 एफआईआर पर अनुसंधान कार्यवाही जारी है वहीं, केवल 218 प्रकरणों में पुलिस द्वारा एफआर लगाई गई हैं। माइंस व गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने भी पुलिस में दर्ज प्रकरणों पर त्वरित अनुसंधान कर कार्यवाही की पर जोर दिया जाता रहा है।

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कहां कितने मामलें

प्रदेश में सर्वाधिक 1225 एफआईआर भीलवाड़ा में दर्ज करवाई गई थी, जिसमें से 1118 प्रकरणों में कोर्ट में चालान पेश कर दिया गया है। इसी तरह से धौलपुर में 508 में से 486, दौसा में 165 में से 152, भरतपुर में 151 में से 59, बीकानेर में 61 में से 50, जैसलमेर में 26 में से 25, श्रीगंगानगर में 190 में से 188, झालावाड़ में 135 में से 131, बूंदी में 136 में से 131, पाली में 80 में से 79 उदयपुर में 84 में से 78, अजमेर में 22 में से 21, नागौर में 65 में से 61 सहित अधिकांश प्रकरणों में अनुसंधान कार्य पूरा करवाकर संबंधित थानों द्वारा कोर्ट में चालान पेश किया जा चुका है।