16 सितंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पचपदरा रिफाइनरी आगजनी पर सांसद बेनीवाल के गंभीर सवाल, बोले- करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाने के बाद भी ये हाल?

Pachpadra Refinery Fire: पचपदरा रिफाइनरी में आगजनी पर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने इसे लापरवाही और जल्दबाजी का नतीजा बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Arvind Rao

Apr 21, 2026

MP Ummedaram Beniwal - File PIC

MP Ummedaram Beniwal - File PIC

Pachpadra Refinery: बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने पचपदरा स्थित एचआरएलएल रिफाइनरी की सीड्यू-वीडीयू (CDU-VDU) यूनिट में लगी भीषण आग को लेकर केंद्र सरकार और रिफाइनरी प्रबंधन पर तीखे हमले किए हैं।

उन्होंने इस घटना को केवल एक तकनीकी दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे 'भ्रष्टाचार, गंभीर लापरवाही और असुरक्षित कार्यप्रणाली' का जीता-जागता प्रमाण बताया है।

सांसद बेनीवाल ने रेखांकित किया कि जिस यूनिट का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित था, उसी में आग लगना सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी को दर्शाता है। उन्होंने इस घटना के पीछे के मुख्य कारणों पर सवाल उठाते हुए निम्नलिखित बिंदु रखे।

प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर आधे-अधूरे काम को पूरा दिखाने की जल्दबाजी में सुरक्षा मानकों से समझौता किया गया।
निर्माण कार्य में ऐसी कंपनियों को शामिल किया गया, जिनके पास पर्याप्त अनुभव नहीं था, जिससे कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हुई।

परियोजना की शुरुआती लागत 37 हजार करोड़ रुपए थी, जो अब बढ़कर 80 हजार करोड़ रुपए हो चुकी है। बेनीवाल ने अनुमान जताया कि प्रोजेक्ट पूरा होने तक यह सवा लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है, जो वित्तीय पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।

आर्थिक नुकसान और जनता की कमाई का दुरुपयोग

बेनीवाल ने दौरे के स्थगन से हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई। उनका दावा है कि प्रधानमंत्री की सभा और दौरे की तैयारियों, भीड़ जुटाने और प्रशासनिक तामझाम पर 1000 से 1200 करोड़ रुपए पानी की तरह बहा दिए गए। आगजनी और कार्यक्रम रद्द होने से हुआ यह खर्च जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी है।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

सांसद ने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि घृणित लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। रिफाइनरी के सुरक्षा ऑडिट की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो ताकि सच सामने आ सके। उन्होंने अंत में चेतावनी दी कि ऐसी घटनाएं न केवल आर्थिक क्षति पहुंचाती हैं, बल्कि महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के प्रति आमजन के विश्वास को भी कमजोर करती हैं।