
जयपुर। नींदड़ आवासीय योजना में दोबारा सर्वे के मामले में जेडीए पीछे हटता जा रहा है। जिला कलक्टर सिदृधार्थ महाजन के साथ सोमवार को जेडीए कार्यालय में हुई संघर्ष समिति की वार्ता में मामला और उलझ गया। कलक्टर व जेडीए अधिकारियों ने संघर्ष समिति की आर्थिक सर्वे सहित कई मांग को सिरे से नकार दिया।
यह भी पढें :मोदी सरकार का हज पर वार! जयपुर , भोपाल समेत 12 शहरों से हज उडान नहीं!
उन्होंने केवल तीन बिन्दुओं पर सर्वे करा सकने का दो टूक जवाब दे दिया। इससे संघर्ष कर रहे लोगों का मुंह उतर गया। हालांकि, समिति पदाधिकारियों व प्रतिनिधि मण्डल सदस्यों ने कलक्टर के इस प्रस्ताव पर मंगलवार तक जवाब देने की बात कहकर रवाना हो गए। इससे सरकार के किसान-काश्तकारों के सत्याग्रह पर हावी होने की स्थिति पनप रही है।चौथे दौर की यह वार्ता भी बेनतीजा रहने से प्रभावितों की परेशानी बढ़ती जा रही है। इस बीच प्रतिनिधि मण्डल ने शाम को यूडीएच मंत्री के साथ प्रस्तावित वार्ता भी स्थगित कर दी। गौरतलब है कि नींदड़ में बड़ी संख्या में प्रभावित जमीन समाधि सत्याग्रह कर रहे हैं। जेडीसी के विदेश जाने के बाद स्थितियां ही बदल गई हैं।
कलक्टर : इन्हीं का सर्वे होगा
- मुआवजे में स्ट्रक्चर, पेड़, कुआ सहित अन्य छूट गया हो तो उसकी दोबारा स्थिति देखना।
- सिंचित, असिंचित भूमि की स्थिति।
- मुआवजा गणना में गड़बड़ी या कमी हुई हो।
संघर्ष समिति : इन बिन्दुओं पर सर्वे की मांग
- एक-एक ढाणी, हर कॉलोनी का सर्वे दोबारा हो।
- एक व्यक्ति या एक परिवार उसकी न्यूनतम आवश्यकता की रिपोर्ट भी बनाई जाए। इससे पता चलेगा कि एक परिवार के लिए कितनी जमीन की जरूरत है।
- मकानों की स्थिति क्या है और कितना नुकसान होगा, उसका पूरा सर्वे हो।
- निवासियों की आर्थिक स्थिति और अवाप्ति के बाद जीवन पर पडऩे वाले प्रभाव का आकलन किया जाए।
- रोजगार की व्यवस्था भी देखी जाए कि अवाप्ति के बाद मुआवजा के तौर पर मिलने वाली जमीन उसके उपयोगी होगी या नहीं।
सरेंडर जमीन पर भी काम नहीं होने की मांग भी नकारी
संघर्ष समिति कलक्टर व जेडीए अधिकारियों के प्रस्ताव पर रजामंद होते दिखाई दिए। इस बीच संघर्ष समिति ने मांग रखी की जब तक चिन्हित बिन्दुओं पर सर्वे नहीं हो जाता तब तक मौके पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जोन जमीन सरेंडर हो चुकी है वह जेडीए की है, उस पर काम किया जाता रहेगा। हालांकि, कलक्टर ने किसानों को आपसी विचार के लिए 24 घंटे का समय दिया है। इस बीचकिसानों ने साफ कर दिया है कि आवासीय योजना का दोबारा सर्वे होने तक हमकोई कार्रवाई नहीं होने देंगे।
Published on:
09 Oct 2017 04:19 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
