16 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हे सरकारी प्रभु… हम शर्मिंदा हैं…

हे सरकारी प्रभु... हम शर्मिंदा हैं...

2 min read
Google source verification
lord  shiva

Vaishakh snan: worship lord shiv and vishnuji

जयपुर
देव स्थान विभाग राजस्थान एक बार फिर से चर्चा मंे है। इस बार तो सरकारी ठाकुर जी को खाने-पीने तक के लिए तरसा दिया गया है। एेसा पहले कभी नहीं हुआ है लेकिन इस बार पता नहीं विभाग के अफसर कहां व्यस्त हैं कि उन्होनें देवस्थान विभाग के मंदिरों मंे भोग प्रसादी के लिए बजट तक नहीं भेजा है। जबकि निजी और स्वतंत्र प्रभार वाले मंदिरों में तो गर्मी को देखते हुए भोग भी बदल दिया गया है, पंखे-कूलर तो दूर ठाकुर जी के लिए एयर कंडिशनर तक लगाने की तैयारी चल रही है।


24 साल से चल रही परम्परा टूटी
दरअसल देवस्थान विभाग के अधीन प्रत्यक्ष प्रभार के मंदिरों को चौबीस साल से लगातार समय पर पूरे महीने के लिए भोग प्रसादी का बजट पहले ही दे दिया जाता है। फिर इस बजट से मंदिर के पुजारी भोग-प्रसाद का पूरा इंतजाम करते हैं। लेकिन इस बार 29 मंदिरों में ठाकुरजी के भोग के लिए पूरे अप्रैल माह सरकारी भोग सामग्री नहीं मिली है और नही बजट ही मिला है। विभाग सभी मंदिरों के लिए पहले एक साथ सहकारी उपभोक्ता भंडार से कार्यालय में सामग्री मंगाता है। उसके बाद प्रत्येक मंदिर में माह की पांच से 10 तारीख तक सामग्री सप्लाई कर दी जाती रही है। सामग्री नहीं मिलने से पूरे महीने पुजारियों ने अपने खर्च से ठाकुरजी को भोग लगाया। इससे उनमें रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि पहले ही सरकारी वेतन कम है, उस पर भोग सामग्री भी खुद को ही खरीदनी पड़ रही है। कई बार विभाग में जाकर शिकायत दर्ज करा दी लेकिन वहां कोई सुनवाई नहीं हो रही।


बजट में भी घालमेल आ रहा है सामने
देव स्थान विभाग के पुजारियों का कहना है कि बजट में भी घालमेल किया जा रहा है। किसी मंदिर को कम तो किसी को ज्यादा सामान भेजा जाता है। जबकि पिछले बजट में प्रत्यक्ष प्रभार के सभी मंदिरों की भोग सामग्री पर खर्च होने वाली राशि को दुगुना किया गया था। लेकिन विभाग ने भोग सामग्री के बजट की राशि की 80 प्रतिशत राशि प्रत्यक्ष प्रभार की जगह निधि के मंदिरों में दी जाने लगी। शेष बची 20 प्रतिशत राशि को प्रत्यक्ष प्रभार के मंदिरों में एक वित्तीय वर्ष में सभी तरह के खर्च बिजली, पानी के बिल, उत्सव मनाने, प्रतिदिन का भोग और अन्य खर्च को मिलाकर देने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। इसके चलते पूरे महीने ही मंदिरों में भोग सामग्री नहीं पहुंचाई गई। पुजारियों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी सामग्री दुगुनी तो नहीं कर रहे बल्कि उन्हें ही सामग्री खरीदकर बिल पेश करने की बात कही जा रही है, जबकि पुजारी चाहते हैं कि उन्हें पहले की तरह चल रही व्यवस्थानुसार सामग्री ही दी जाए।

स्वतंत्र प्रभार के प्रमुख मंदिर
चांदनी चौक के आनंद कृष्ण बिहारीजी का मंदिर, बृजनिधिजी का मंदिर व प्रतापेश्वर मंदिर, त्रिपोलिया का बृजराज बिहारीजी का मंदिर, आमेर रोड स्थित बलदेवजी, परशुरामद्वारा, बाबा हरिशचंद्र मार्ग स्थित नवलकिशोरजी मंदिर और चौड़ा रास्ता स्थित गोवर्धननाथजी का मंदिर सहित 29 मंदिर हैं।