
प्रतीकात्मक तस्वीर: पत्रिका
यदि आप प्रदेश में जंगल सफारी देखना चाहते हैं और ऑनलाइन टिकट बुक कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं। क्योंकि पर्यटकों को फर्जी वेबसाइट में फंसकर फर्जी टिकट दिए जा रहे हैं। साथ ही उनसे दो-तीन गुना तक टिकट के दाम वसूले जा रहे हैं। पर्यटक जब मौके पर पहुंचते हैं तक उन्हें इस धोखाधड़ी का पता चलता है। ऐसे केस लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। क्योंकि वन विभाग इसमें कोई खास रुचि नहीं दिखा रहा है। बारिश के बाद प्रदेश में पर्यटन का सीजन शुरू हो गया है।
अगले महीने से इस साल के अंत तक झालाना जंगल, रणथम्भौर, सरिस्का समेत अन्य जंगलों में संचालित हो रही सफारी में पर्यटकों का बूम दिखाई देगा। इनका फायदा उठाकर एजेंट सरकारी और उसके नाम से हूबहू मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर पर्यटकों से मनमानी वसूली कर रहे हैं। झालाना जंगल, हाथीगांव, रणथम्भौर के नाम से ऐसी कई वेबसाइट चल रही है।
इनमें सरकारी टिकट दरें ऑफिशियल रेट से कई गुना तक ज्यादा वसूली जा रही है। उदाहरण के तौर पर झालाना सफारी में प्रति पर्यटक चार्ज 834 रुपए है जबकि वेबसाइट से 1500 से 2 हजार रुपए तक वसूले जा रहे हैं। वहीं वन विभाग पर्यटकों को केवल अधिकृत वेबसाइट से ही बुकिंग करने की सलाह दी जाती है।
हाथीगांव एलीफेंट सफारी के नाम पर कई वेबसाइट संचालित हो रही है। इससे हाथी मालिक परेशान है। हाथीगांव विकास सोसायटी के अध्यक्ष बल्लू खान ने बताया कि फर्जी वेबसाइट से पांच से दस गुना तक मनमाना किराया वसूला जा रहा है। वन विभाग, पुलिस प्रशासन, साइबर क्राइम समेत हर जगह शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई राहत नहीं मिली।
यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। पता करवाती हूं यदि ऐसा है तो हम नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
शिखा मेहरा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन विभाग
गत दिनों रणथम्भौर में एक ट्रेवल एजेंट ने चार पर्यटकों को टिकट सोल्ड होने का झांसा देकर एडवांस पैसा मंगवा लिया और रणथम्भौर टाइगर रिजर्व लिखे लेटर हैड का प्रिंट देकर बुकिंग दर्शा दी। सफारी शुरू होने से कुछ देर पहले ही पर्यटक को टिकट निरस्त होने की सूचना दी। इससे पर्यटक काफी परेशान हुए।
Published on:
24 Sept 2025 02:09 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
