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जम्मू-कश्मीर से Special Report: गोला बारूद के धमाकों के बीच यहां बजते हैं ढोल-नगाड़े

जम्मू-कश्मीर से Special Report: गोला बारूद के धमाकों के बीच यहां बजते हैं ढोल-नगाड़े

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जम्मू।

जम्मू-कश्मीर का नाम सामने आते ही जेहन में गोलियों की बौछार, गोला बारूद के धमाके और आतंकियों की नापाक हरकतों की तस्वीर उभर आती है। लेकिन धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले इस इलाके की कुछ तस्वीरें ऐसी भी हैं, जो दिल को सुकून देती हैं। पत्रिका संवाददाता आनंदमणि त्रिपाठी ने कश्मीर के हालात का जायजा लेते हुए वहां की ग्राउंड रिपोर्ट को जाना।

जहां से रोजाना सीजफायर उल्लंघन, आतंकियों से मुठभेड़ और लोगों के पलायन की खबर ही आती हों, बाहर बैठकर जहां शांति और सुकून की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता हो। दिलो दिमाग में सिर्फ दहशत की तस्वीर ही छाई रहती हों, वहां तस्वीर का दूसरा चेहरा सामने ही नहीं आता।

जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर की बात करें तो वहां हमेशा सीमा पार से पाकिस्तान की नापाक हरकतों की खबरें ही सामने आती रही हैं, लेकिन इन दिनों अखनूर में गोला बारूद के धमाकों के बीच भी ढोल-नगाड़े बज रहे हैं।

लोगों में उल्लास है और गांव गांव में कुश्ती-दंगल के आयोजन हो रहे हैं। रेत से लिपटे पहलवानों के दांव-पेच और हर बार किसी के चित्त होने पर गूंजती ढोल की थाप वाकई सुकून देती है। अखनूर सेक्टर ही नहीं, जम्मू के आरएसपुरा, रामगढ़ व अन्य सेक्टरों में भी इन दिनों ऐसा ही उल्लास छाया हुआ है। जिंदमडेलू, विशनाह, लेतर विजनपुर आदि गांवों में सैकड़ों की संख्या में पहलवान इन कुश्ती दंगलों में शिरकत कर रहे हैं। यहां तक कि कश्मीर के राजौरी व उधमपुर आदि आतंक प्रभावित इलाकों के पहलवान भी इन आयोजनों में शिकरत कर रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर के इन इलाकों में हो रहे दंगल के पीछे आस्था भी जुड़ी है। लोग पीर-बाबाओं की दरगाहों के सालाना मेलों के मौके पर इनका आयोजन करते हैं। पूरा गांव आयोजन में बनता है भागीदार। गांव से ही एकत्रित होने वाली धनराशि से विजेता-उपविजेता पहलवानों का पुरस्कार बांटे जाते हैं।

आरएसपुरा के जिंदडेलू गांव में इन दिनों पीर बाबा करीम अली शाह की दरगाह के मेले पर दंगल चल रहे हैं तो रामगढ़ के बिजनपुर में बाबा कपला पीर की दरगाह के मेले पर दंगल का आयोजन किया गया है। स्थानीय लोग कहते हैं कि दहशत इस उल्लास के आगे अपने आप दब जाती है। इन आयोजनों से युवकों में देशभक्ति का जज्बा भी पैदा होता है। कुश्ती में इनाम मिलता है। प्रोत्साहन मिलता है और ऐसे युवा पुलिस और सेना की भर्ती के लिए भी फिट हो जाते हैं।

इन कुश्तियों के प्रति उत्साह देखते ही बनता है। लोग बिना की भय के इसमें शामिल हो रहे हैं। उपद्रव व आतंक प्रभावित जम्मू-कश्मीर की यह तस्वीर देख वाकई स्थानीय लोगों के जज्बे को सलाम करने को प्रेरित करता है।