
कुछ इस तरह तैयार किए गए हैं गेट। (फोटो-पत्रिका)
जयपुर। दशहरे में एक महीना और पांच दिवसीय दीपोत्सव में अभी डेढ़ महीने से ज्यादा का समय शेष है। लेकिन शहर के कुछ इलाकों के बाजारों में अभी से सजावटी गेट लगाए जाने लगे हैं। नगर-निगम की पूर्व अनुमति से लगाए जाने वाले इन गेट की पत्रिका संवाददाता ने पड़ताल की तो खेल सामने आया।
संवाददाता ने व्यापारी बनकर मेला आयोजकों से बात की तो उन्होंने बिना किसी भय के 50 हजार रुपए मांगते हुए कहा, 'आप निगम की चिंता न करें, वो हम देख लेंगे।' विद्याधर नगर में बिना किसी अनुमति के दशहरा मेले की आड़ में बांस-बल्लियों से गेट सजाए जा रहे हैं।
अम्बाबाड़ी सर्कल पर तो गेट सजाने के दौरान सुरक्षा का ही ध्यान नहीं रखा जा रहा था। एक ओर मजदूर बांस बांध रहा था और दूसरा हिस्सा हवा में लटक रहा था। बारिश हुई तो मजदूर उतर गया और बांस का एक हिस्सा हवा में ही लटकता रहा। जबकि, नीचे से वाहन चालकों की आवाजाही हो रही थी।
यदि गेट पर विज्ञापन लगाए जाएंगे तो उसकी अनुमति मुख्यालय से मिलेगी। अभी तक हमारे यहां से कोई अनुमति नहीं ली गई है। -करणी सिंह, उपायुक्त, विद्याधर नगर जोन
हमारे यहां से कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। यदि अस्थायी विज्ञापन लगाए जा रहे हैं तो उसकी अनुमति जोन स्तर से ली जाएगी। -मनोज वर्मा, उपायुक्त, राजस्व शाखा, ग्रेटर निगम
(बातचीत विद्याधर दशहरा मेला समिति के पदाधिकारी रिद्धिकरण से हुई है। पत्रिका के पास बातचीत की रिकॉर्डिंग सुरक्षित है।)
Published on:
02 Sept 2025 12:41 pm
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