
PM crop insurance scheme gives amount at the rate of 23 rupees per acre
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में सोमवार को उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री केके विश्नोई ने कृषकों के लंबित बीमा क्लेम के शीघ्र निपटारे की घोषणा की। उन्होंने बताया कि किसानों के लंबित दावों का निराकरण प्रक्रियाधीन है और शीघ्र ही भुगतान किया जाएगा। बीमा क्लेम से वंचित किसानों के लिए अधिकारियों और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों संग बैठक कर विचार किया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत हुए भुगतान और आगामी योजनाओं की भी जानकारी दी। सरकार किसानों के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे वे प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई कर सकें।
उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री केके विश्नोई ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि कृषकों के लम्बित बीमा क्लेमों का भुगतान प्रक्रियाधीन है। लम्बित प्रकरणों का निराकरण कर शीघ्र ही भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न कारणों से बीमा क्लेम के लिए अपात्र माने गए कृषकों के संबंध में बीमा कम्पनियों के प्रतिनिधियों एवं विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर विचार किया जाएगा। विश्नोई ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किसानों के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्य द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का कृषि मंत्री की ओर से जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जालौर जिले में खरीफ में कुल 35 हजार 914 किसानों को 33.64 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम वितरित किए गए। इसी प्रकार रबी में 37 हजार 507 कृषकों को 105.75 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम दिए गए। उन्होंने कहा कि जालौर जिले में रिलायंस जनरल इंश्योरेन्स के माध्यम से कुल 45 करोड़ 70 लाख 33 हजार 982 रुपए के क्लेम के विरुद्ध 43 करोड़ 67 लाख 21 हजार 938 रुपए के क्लेम वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि शेष 2 करोड़ 3 लाख 12 हजार 44 रुपये के शेष रहे क्लेम के भुगतान की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र सांचौर में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के अन्तर्गत खरीफ 2023 में 3217 किसानों को 3.49 करोड़ के उपज आधारित बीमा क्लेम वितरित किये गए। इसी प्रकार रबी 2023-24 में 19 हजार 519 किसानों को 71.71 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम वितरित किये गए।
इससे पहले विधायक जीवाराम चौधरी के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत खड़ी फसल (बुवाई से कटाई तक) में सूखा, लंबी सूखा अवधि, बाढ़, जलप्ला्वन, कीट एवं व्याधि, भूस्खलन, बिजली गिरने से प्राकृतिक आग, तूफान, ओलावृष्टि व चक्रवात के कारण उपज में नुकसान के लिए व्यापक जोखिम बीमा क्षेत्रीय दृष्टिकोण के आधार पर देय होता है। औसत उपज के अनुमान के लिए मुख्य फसलों के लिए पटवार स्तर पर 4 फसल कटाई प्रयोग तथा गौण फसलों के लिए तहसील स्तर पर 16 फसल कटाई प्रयोग प्रति अधिसूचित फसल के लिए आयोजित कराए जाते हैं। फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त औसत उपज की तुलना पूर्व मे तय की गई गारंटी उपज से की जाकर बीमा क्लेम की गणना की जाती है।
विश्नोई ने कहा कि फसल कटाई के उपरान्त होने वाले नुकसान- फसल कटाई उपरांत आगामी 14 दिवस की अवधि तक खेत में सूखने के लिए काटकर फैलाकर छोडी गई अधिसूचित फसल को चक्रवात, चक्रवाती वर्षा, असामयिक- बेमौसमी वर्षा तथा ओलावृष्टि से क्षति होने की स्थिति में फसल की क्षति का आकलन व्यक्तिगत बीमित फसल के कृषक के स्तर पर किए जाने का प्रावधान हैं। प्रभावित बीमित फसल के कृषक को घटना घटने के 72 घण्टे में भारत सरकार द्वारा संचालित कृषि रक्षक पोर्टल एवं हेल्प लाईन 14447, क्रॉप इन्श्योरेन्स एप अथवा लिखित में संबंधित वित्तीय संस्थान या कृषि विभाग को सूचना देना जरूरी है। सूचना प्राप्ति के 48 घण्टे के अंदर बीमा कम्पनी द्वारा सर्वेयर की नियुक्ति की जाकर सर्वेयर द्वारा क्षति का आकलन सम्बिन्धित कृषक व स्थानीय कृषि विभाग के अधिकारी/कर्मचारी के साथ संयुक्त रूप से किया जाता है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बीमित फसल के किसान को व्यक्तिगत स्तर पर फसल में हुई हानि का आकलन कर बीमा क्लेम दिये जाने का प्रावधान है।
Published on:
24 Mar 2025 04:20 pm
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