
सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ
Pension Fraud: जयपुर। राजस्थान में सरकारी खजाने को चूना लगाने का ऐसा मामला सामने आया है, जहां इंसान तो दुनिया छोड़ गए, लेकिन उनके नाम पर जारी पेंशन अब भी ‘सफर’ कर रही है। 3.50 लाख से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां व्यक्ति की मृत्यु होने या विधवा के पुनर्विवाह के बावजूद महीनों तक पेंशन उठाई जाती रही। आलम यह है कि विभाग को अब 317 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली करनी है, जो उसके लिए पहाड़ जैसी चुनौती बन गई है।
योजना में 1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2024 के बीच 3 लाख 38 हजार 659 पेंशनधारकों से 352 करोड़ 22 लाख रुपए की रिकवरी की जानी थी, लेकिन विभाग अब तक सिर्फ 35 हजार 673 मामलों में ही पूरी रिकवरी कर सका है। ऐसे में अब तक मात्र 35 करोड़ 15 लाख रुपए की वसूली हुई है, जबकि 317 करोड़ 7 लाख रुपए से अधिक की राशि अभी भी बाकी है।
दरअसल, पेंशनर का वार्षिक वेरिफिकेशन होने के बावजूद बीच की अवधि में मृत्यु या पात्रता खत्म होने की सूचना विभाग को समय पर नहीं मिल पाती, जिसका लाभ उठाकर महीनों तक पेंशन निकाली जाती है। कई मामलों में पेंशनधारी की मृत्यु वेरिफिकेशन के तुरंत बाद हो जाती है, लेकिन विभाग को इसकी जानकारी महीनों बाद मिलती है।
ऐसे में मृत्यु के बाद भी नवंबर-दिसंबर तक उसके खाते में पेंशन जाती रहती है, जिससे सरकार को बड़ा राजस्व नुकसान होता है। इसी तरह विधवा के पुनर्विवाह की जानकारी भी समय पर विभाग को नहीं मिल पाती।
इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए विभाग नया डिजिटल पोर्टल तैयार कर रहा है। इसके तहत पंचायत स्तर पर ग्राम सेवक और पटवारी को बाध्य किया जाएगा कि गांव या कस्बे में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर तत्काल विभाग को ऑनलाइन सूचना दें, ताकि उसकी पेंशन तुरंत रोकी जा सके।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मंत्री अविनाश गहलोत ने बताया कि नए पोर्टल के लागू होने के बाद हर महीने मृत्यु संबंधी अपडेट विभाग को मिल सकेगा, जिससे पेंशन के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और सरकारी खजाने को हो रहे नुकसान को समय रहते बचाया जा सकेगा। इसके अलावा ग्राम सभाओं पर फिजिकल वेरिफिकेशन और गिव-अप अभियान के माध्यम से भी ऐसे मामलों को कम करने की कोशिश की जा रही है।
1 अप्रेल 2022 से 31 मार्च 2024 के बीच सामने आए मामलों को देखा जाए तो जयपुर सबसे ऊपर है। यहां 22,691 पेंशनधारकों से 24.28 करोड़ रुपए की राशि रिकवरी योग्य पाई गई। इसी तरह सीकर में 17,258 मामले, झुंझुनूं में 13,948 मामले और भीलवाड़ा में 13,422 मामले सामने आए। आदिवासी जिलों में देखा जाए तो डूंगरपुर में 10,371 मामले, बांसवाड़ा में 6,778 मामले और उदयपुर में 13,517 मामले सामने आए।
1 अप्रैल 2025 से 19 दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश में कुल 3,07,802 पेंशनरों की पेंशन निरस्त की गई। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, निरस्तीकरण के प्रमुख कारणों में मृत्यु के बाद भी पेंशन जारी रहना, डुप्लीकेट पेंशन, आय सीमा से अधिक होना, पुनर्विवाह की सूचना नहीं देना, आधार/भामाशाह/जनआधार अपडेट नहीं होना तथा अन्य अपात्रताएं शामिल हैं। इसमें झालावाड़ सबसे आगे रहा, जहां 19,803 पेंशनरों की पेंशन बंद की गई। इसके बाद टोंक में 15,275, पाली में 14,233, भीलवाड़ा में 13,988 और बीकानेर में 13,135 पेंशनरों की पेंशन निरस्त की गई।
पेंशन वेरिफिकेशन साल में एक बार होती है। वेरिफिकेशन के बाद यदि किसी की मृत्यु हो जाती है तो भी उसके खाते में पेंशन जाती रहती है। अब ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, उसकी सूचना उसी महीने विभाग को मिल जाएगी। इस तरह का पोर्टल तैयार कर रहे हैं।
- अविनाश गहलोत, मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग
Published on:
29 Dec 2025 08:15 am
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