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जब राजस्थान के पोखरण में परमाणु बम फट रहे थे ताे अटल बिहारी वाजपेयी क्या कर रहे थे?

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Pokhran Nuclear Test 1998

जब राजस्थान के पोखरण में परमाणु बम फट रहे थे ताे अटल बिहारी वाजपेयी क्या कर रहे थे?

जयपुर। 11 मई 1998 काे भारत ने तीन परमाणु हथियारों का परीक्षण किया था। इसके दो दिन बाद दो परमाणु परीक्षण और किए गए। तीन दिन में पांच टेस्ट हुए, जो सफल रहे। इस सफलता के बाद वैज्ञानिकों और देश में जश्न का माहौल था। सफल परीक्षण के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र घोषित कर दिया था। ये देश के लिए गर्व की बात थी।

क्या हुआ था उस दिन
राजस्थान के सरहदी जिले जैसलमेर के पोखरण की वो सुबह बहुत शांत थी... हवा बह रही थी... तभी कुछ निर्देश दिए गए और ट्रक, बुलडोजर खोदे गए कुओं की ओर बढ़ने लगे। कुछ ही पलों में मशीनों की तेज आवाजें सुनाई देने लगीं। थोड़ी ही देर में कुएं में न सिर्फ बालू भर दी गई बल्कि इनके ऊपर बालू के छोटे छोटे पहाड़ भी बना दिए गए। इनसे मोटे-मोटे तार निकले थे।

2015 में सामने आई थी अटल बिहारी वाजपेयी की आखिरी तस्वीर

इनमें थोड़ी ही देर में आग लगा दी गई और इसके बाद एक तेज विस्फोट हुआ। इस विस्फोट से मशरूम के आकार का स्लेटी रंग का बादल निकला। करीब 20 लोग बड़ी उम्मीद से इसे निहार रहे थे। इतने में इन वैज्ञानिकों में से एक ने जोर से कहा, 'Catch us if you can', यानी 'पकड़ लो अगर हमें पकड़ सको'... इसके बाद वहां हंसी के ठहाके गूंजने लगे। उनका मिशन कम्पलीट हो चुका था।

भावुक आवाज में वैज्ञानिकों को बधाई दी
11 मई 1998 के दिन तपती दोपहर में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सरकारी निवास के ड्रॉइंग रूम में छह लोग (अटल बिहारी, गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस, वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा आैर प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव बृजेश ) बैठे हुए थे।

सभी तनाव में थे कि क्या हाेगा। करीब 3 बजकर 55 मिनट पर कलाम ने जैसे ही प्रधानमंत्री वाजपेयी को हॉटलाइन पर 'बुद्ध फिर मुस्कराए' का संदेश देकर लाइन काटी सभी गदगद हाे गए। आडवाणी गीली हो आईं आंखों को पोंछते नजर आए। वाजपेयी ने भी फाेन पर भावुक आवाज में वैज्ञानिकों को बधाई दी, जिनके बलबूते ये काम मुमकिन हो पाया था। इसके बाद पूरा देश जश्न मनाने में मशगूल हो गया।

58 इंजीनियर रेजीमेंट ने जिम्मेदारी से संभाला काम
भारत का ये सीक्रेट मिशन अमेरिका की एजेंसी CIA की सबसे बड़ी इंटेलिजेंस असफलता माना जाता है। विस्फोट के बाद अमरीका ने अपनी सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें डाउनलोड कीं। उनके वैज्ञानिकों के बीच यही चर्चा रही कि आखिर इतने गोपनीय तरीके से भारतीयों ने इस परमाणु टेस्ट को कैसे अंजाम दिया?

दरअसल भारतीय सेना की 58 इंजीनियर रेजीमेंट को खास तौर पर इस काम के लिए चुना गया था। इस रेजीमेंट के कमांडेंट थे कर्नल गोपाल कौशिक। भारत के परमाणु हथियारों का परीक्षण इन्हीं के संरक्षण में होना था।

साथ ही उन पर जो सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी, वो थी इस मिशन को सीक्रेट रखना। जिसे उन्होंने व उनकी रेजीमेंट ने इतने अच्छे से निभाया कि भारत ने मई, 1998 में जो पांच परमाणु हथियारों का परीक्षण किया, उसे CIA की सबसे बड़े इंजेलिजेंस असफलताओं में से एक माना जाता है।

भारत पर नजर रखने के लिए किए थे अरबों रुपए खर्च
भारत के पोखरण पर नजर रखने के लिए अमरीका ने अरबों रुपए खर्च किए थे। इसके लिए अमरीका ने चार सैटेलाइट लगाए थे। भारतीय वैज्ञानिकों ने फिर भी सीक्रेट तरीके से आॅपरेशन को अंजाम दिया।

इन सैटेलाइट्स के बारे में कहा जाता था कि ये जमीन पर खड़े भारतीय सैनिकों की घड़ी में से समय भी देख सकते हैं। CIA ने तो इतना कह दिया था कि इन सैटेलाइट्स के पास 'human intelligence' हैं, लेकिन इन सारे दावों को दरकिनार कर भारत ने दुनिया भर में अपनी धाक साबित कर दी।