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Rajasthan : छात्रसंघ चुनाव के ज़रिए यूथ वोटर्स पर सियासी दलों की नज़र, AAP-JJP भी आज़माएगी किस्मत

छात्रसंघ चुनाव के ज़रिए यूथ वोटर्स पर सियासी दलों की नज़र, AAP-JJP भी आज़माएगी किस्मत, तो BSP-RLP नहीं दिखा रही दिलचस्पी

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Political Parties on Rajasthan University Elections Latest News Update

जयपुर।

प्रदेश में चुनाव भले ही छात्रसंघ के हो रहे हों, लेकिन इन पर हमेशा की तरह राजनीतिक दलों की भी पूरी नज़र है। ज़ाहिर है, सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन यानी एनएसयूआई और प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के चुनाव मैदान में होने के कारण इन दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की दिलचस्पी छात्रसंघ चुनाव में है, लेकिन इनके अलावा अन्य पार्टियां भी इन चुनावों के ज़रिये यूथ वोटर्स के रुख पर नज़र बनाए हुए है।

जेजेपी भी आज़मा रही किस्मत
राजस्थान के छात्रसंघ चुनाव में इस बार हरियाणा की जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) की छात्र विंग इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन (इंशो) चुनाव मैदान में ताल ठोकने जा रही है। पार्टी के महासचिव दिग्विजय सिंह चौटाला पिछले दिनों जयपुर में आकर छात्रसंघ चुनावों में ‘इंसो’ की उपस्थिति दर्ज करवाने का ऐलान कर चुके हैं। पार्टी नेताओं का भी कहना है कि छात्रसंघ चुनाव के ज़रिये वे यूथ वोटर्स पर पैनी निगाह रख रहे हैं, क्यूंकि इन चुनावों के बाद अगला टारगेट वर्ष 2023 में राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं।


आम आदमी पार्टी छात्रसंघ चुनाव
दिल्ली और पंजाब के बाद राजस्थान में सियासी ज़मीन मजबूत करने में जुटी आम आदमी पार्टी भी छात्रसंघ चुनाव में किसमत आज़माती दिख रही है। पार्टी की छात्र इकाई छात्र युवा संघर्ष समिति ने बांसवाड़ा जिले में कॉलेज चुनाव में प्रत्याशी उतारने की बात कही है। साथ ही अन्य जगहों में भी प्रत्याशी तलाशने की कवायद जारी है।

पिछले दिनों राजस्थान दौरे पर आये आप पार्टी के राष्ट्रीय परिषद सदस्य शैलेंद्र प्रभात शर्मा ने बताया था कि बांसवाड़ा स्थित गोविंद गुरु राजकीय महाविद्यालय में प्रत्याशी उतारे जाएंगे। पार्टी नेताओं का दावा है कि आगामी छात्र संघ चुनाव से आम आदमी पार्टी के चुनावी अभियान की शुरुआत होगी।

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बसपा ने फिलहाल बनाई दूरी, पर नज़र पूरी
बहुजन समाज पार्टी ने हालांकि छात्रसंघ चुनाव से दूरी बनाये हुई है, लेकिन पार्टी नेताओं की नज़र चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों पर ज़रूर रहेगी, ताकि विधानसभा चुनाव के दौरान यदि ज़रुरत हुई तो इन विजयी प्रत्याशियों को अपने पक्ष में कर सकें।

राजस्थान बसपा प्रदेश अध्यक्ष भगवान् सिंह बाबा का कहना है कि इससे पहले हुए छात्रसंघ चुनाव में ज़रूर पार्टी की छात्र इकाई बहुजन स्टूडेंट फ्रंट ने प्रत्याशी उतारे थे और कुछ कॉलेजों में प्रत्याशी विजयी भी हुए थे। लेकिन इस बार छात्र संघ चुनाव में प्रत्याशी नहीं उतार रहे हैं। फिलहाल फोकस विधानसभा चुनावों को लेकर ही है।


आरएलपी पर भी रहेगी नज़र
राजस्थान छात्रसंघ चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के रुख पर सस्पेंस बना हुआ है। आरएलपी अपने छात्र प्रतिनिधियों को इस चुनाव में उतारती है या नहीं ये देखना दिलचस्प रहेगा। फिलहाल आरएलपी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक सांसद हनुमान बेनीवाल की ओर से भी इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

गौरतलब है कि सांसद हनुमान बेनीवाल खुद छात्र राजनीति से निकलकर सांसद के पद तक पहुंचे हैं। वे राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके बाद वे विधायक और फिर सांसद बने।

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प्रतिष्ठा का सवाल रहेंगे नतीजे
राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव हर बार की तरह इस बार भी प्रमुख सियासी दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना रहेगा। खासतौर से विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र मिशन 2023 के चुनावी मोड पर उतरी कांग्रेस और भाजपा के लिए इस चुनाव के पक्ष में आए नतीजे 'एनर्जी बूस्टर' का काम करेंगे। यही कारण है कि छात्रसंघ चुनाव की हर छोटी-बड़ी हलचलों पर दोनों ही दलों के शीर्ष नेतृत्व की पैनी नज़र रहेगी।

सीनियर नेता संभालेंगे मोर्चा
छात्रसंघ चुनाव की तारीखों के ऐलान होने के साथ ही कांग्रेस पार्टी की छात्र इकाई एनएसयूआई और भाजपा की छात्र इकाई एबीवीपी सक्रीय हो गई हैं। इस बीच खबर है कि दोनों ही दलों के प्रदेश नेतृत्व की ओर से जल्द ही सीनियर नेताओं को भी इन चुनावों के मद्देनज़र ज़िम्मेदारियाँ दी जा सकती हैं।

माना जा रहा है कि छात्र बार की तरह इस बार भी उन नेताओं के कन्धों पर दारोमदार रहेगा, जो छात्र राजनीति से निकलकर प्रदेश स्तरीय राजनीति में सक्रिय हैं। इनमें मौजूदा सांसद, विधायक और प्रदेश संगठन के प्रमुख पदाधिकारी शामिल रहेंगे।