
जयपुर. राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी) की शाही ट्रेन पैलेस ऑन व्हील्स मंत्रियों से लेकर राज्य की टॉप ब्यूरोक्रेसी के लिए मुफ्त की सैर का जरिया बना हुआ है। भले ही पांच साल में ये ट्रेन कभी भी यात्रियों से फुल नहीं रही हो, लेकिन नेताओं और अधिकारियों का अपने परिवार के सदस्यों के साथ मुफ्त का सैर-सपाटा जारी है। इस साल भी अब तक 70 से अधिक लोगों ने मुफ्त में सफर किया है। स्थिति यह है कि निगम के साथ-साथ दूसरे विभागों के आला अधिकारी भी इसमें सफर कर रहे हैं।
कैसे हो कमाई
साल में आठ महीने चलने के बाद शाही ट्रेन को बमुकिश्ल आठ से 10 करोड़ रुपए का फायदा हो पाता है। जबकि दो करोड़ रुपए के आस-पास तो शाही ट्रेन में नि:शुल्क यात्रा कर ली गई है। इस ट्रेन का मुनाफा लगातार कम ही होता जा रहा है। बीते पांच साल के आंकड़ों को देखने पर पता चलता है कि पैलेस ऑन व्हील्स की शाही यात्रा का 415 से अधिक लोग मुफ्त लुत्फ उठा चुके हैं। इसमें भारतीय रेल की ओर से आने वाले यात्रियों की संख्या 300 से अधिक है। आरटीडीसी संचालन के नाम पर रेलवे को प्रति चक्कर 65 लाख रुपए देता है। बीते पांच सालों की बात करें तो संचालन के नाम पर निगम रेलवे को 100 करोड़ रुपए से अधिक दे चुका है। वहीं यदि नियमों की बात करें तो एक फेरे में दो लोग रेलवे और दो आरटीडीसी की ओर से जा सकते हैं।
इस यात्रा में अधिकारियों की पत्नियों से लेकर उनके बच्चे तक शामिल होते हैं। स्थिति यह है कि सफेदपोशों से लेकर राज्य की ब्यूरोक्रेसी को मुफ्त की यात्रा पसंद आ रही है। कुछ तो अधिकारी ऐसे हैं, जिन्होंने दो बार तक परिजनों के साथ यात्रा की है। वर्ष 2012-13 में शाही ट्रेन को करीब 10 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। अगले साल यह घटकर 9.5 करोड़ रुपए रह गया। 2015-16 में 7.8 करोड़, 2016-17 से यह मुनाफा 5.73 करोड़ और इस साल यह मुनाफा छह करोड़ के पार पहुंच गया है। वैसे पैलेस ऑन व्हील्स का प्रति दिन का किराया ही 40 हजार रुपए है, इसमें सात दिन का टूर होता है और एक पूरी यात्रा के दौरान दो लाख रुपए से अधिक का खर्च आता है।