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करुणा से शुरू होता है आत्मविकास : आचार्य राजरक्षितसूरि

जयपुर

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Newsdesk

Aug 26, 2026

Rajasthan

दावणगेरे. सुपाश्र्वनाथ जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य राजरक्षितसूरि ने कहा कि जीवन के वास्तविक विकास की शुरुआत करुणा से होती है। जो व्यक्ति दूसरों को सुख-शांति देने का प्रयास करता है, उसे स्वयं भी शांति प्राप्त होती है। दूसरों को भोजन कराने वाला भूखा नहीं रहता और परोपकार करने वाले को सहायता के लिए भटकना नहीं पड़ता। इसलिए जीवन में सेवा और सद्भाव के अवसर कभी नहीं गंवाने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे सुखमय जीवन के पीछे माता-पिता से लेकर असंख्य जीवों और लोगों का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष योगदान है। घड़ी का एक छोटा पुर्जा भी खराब हो जाए तो पूरी घड़ी रुक जाती है, उसी प्रकार एक भी जीव की उपेक्षा आध्यात्मिक विकास को रोक सकती है। किसान, सैनिक और अपने कर्तव्य में जुटे करोड़ों नागरिकों के योगदान को स्मरण करना सच्ची कृतज्ञता है। इसी अवसर पर वीरचंद राघवजी गांधी की 162वीं जयंती का स्मरण करते हुए आचार्य ने बताया कि आत्माराम महाराज ने उन्हें विश्व धर्म संसद में जैन धर्म का प्रतिनिधित्व करने भेजा था। मात्र 29 वर्ष की आयु में उन्होंने जैन सिद्धांत और कर्मदर्शन को विश्व मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उनके विचारों को अमेरिकी समाचार पत्रों ने प्रमुखता दी। मात्र 37 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।