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राजस्थान में बिजली स्टोरेज के 7 बड़े प्रोजेक्ट अटके, नामी कंपनियों का करोड़ों का निवेश फंसा

Rajasthan Power Storage Projects: राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में बड़े निवेश के दावों के बीच बिजली भंडारण से जुड़े प्रस्तावित 7 पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट (पीएसपी) जमीन पर उतरने से पहले ही अटक गए हैं।

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जयपुर

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Anand Prakash Yadav

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भवनेश गुप्ता

Apr 15, 2026

मानसी वाकल बांध, पत्रिका फोटो

मानसी वाकल बांध, पत्रिका फोटो

Rajasthan Power Storage Projects: राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में बड़े निवेश के दावों के बीच बिजली भंडारण से जुड़े प्रस्तावित 7 पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट (पीएसपी) जमीन पर उतरने से पहले ही अटक गए हैं। अदानी, अवाडा, टीएचडीसी, एनएचपीसी और एसजेवीएन जैसी प्रमुख कंपनियों के ये हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट पानी की कमी, वन एवं अभयारण्य क्षेत्रों की बाधाओं जैसे कारणों से आगे नहीं बढ़ पाए।

कई परियोजनाएं ऐसे इलाकों में प्रस्तावित थीं, जहां या तो जल संसाधन उपलब्ध नहीं हो सके या पर्यावरणीय स्वीकृतियां अटक गईं। इन प्रोजेक्ट्स से राज्य में बिजली स्टोरेज क्षमता बढ़ने और सौर-पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को मजबूती मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा स्थिति ने निवेश के दावों और जमीनी हकीकत को सामने ला दिया। अब कुछ कंपनियां वैकल्पिक स्थान तलाश रही हैं, लेकिन समाधान नहीं मिला तो निवेश के राज्य से बाहर जाने की आशंका बढ़ जाएगी।

कंपनीवार, प्रोजेक्ट की स्थिति…

  • टीएचडीसी- चांगला (उदयपुर)-क्षमता: 1050 मेगावाट-कारण: पानी उपलब्ध नहीं हो सका। मानसी वाकल बांध का पानी जलदाय विभाग के पास है और पीने के लिए उपयोग में आ रहा है, इसलिए जल संसाधन विभाग ने पानी देने में असमर्थता जताई।
  • एसजेवीएन- घाघरी (प्रतापगढ़)-क्षमता: 580 मेगावाट-कारण: वन विभाग की आपत्ति। प्रोजेक्ट का हिस्सा सीतामाता वाइल्डलाइफ सेंचुरी के इको-सेंसिटिव जोन में। नागलिया और जाखम बांध भी अभयारण्य क्षेत्र में हैं।
  • एनएचपीसी- पाहरकलां (सिरोही)

-क्षमता: 1000 मेगावाट
-कारण: वन और जल संसाधन विभाग की आपत्ति। पाहरकलां क्षेत्र को कुम्भलगढ़ टाइगर रिजर्व में शामिल करने का प्रस्ताव है।

  • टीएचडीसी- बिसनपुरा (बूंदी)-क्षमता: 800 मेगावाट-कारण: दोनों प्रस्तावित साइट्स उपयुक्त नहीं पाई गईं। तकनीकी और अन्य कारणों से प्रोजेक्ट रुका।
  • अवाडा एक्वा- पिंडवाड़ा-सिरोही-क्षमता: 1560 मेगावाट-कारण: प्रोजेक्ट का वन क्षेत्र कुम्भलगढ़ टाइगर रिजर्व में शामिल होने की स्थिति में है। कंपनी ने इसे गैर-व्यावहारिक मानते हुए कदम रोके।
  • अदानी सौर ऊर्जा- पीपलूं (बालोतरा)-क्षमता: 1800 मेगावाट-कारण: पानी की कमी। जल संसाधन विभाग ने लूणी नदी से पानी उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी।
  • सेमलिया एनर्जी- बेगूं (चित्तौड़गढ़)क्षमता: 1200 मेगावाट-कारण: पानी के स्रोत पर सहमति नहीं बनी। बेराच नदी से पानी लेने का प्रस्ताव खारिज हुआ। बाद में मेनाली और ब्राह्मणी नदी से पानी लेने का प्रस्ताव भी मंजूर नहीं हुआ।

यह असर पड़ने की आशंका…

  • राज्य की बिजली स्टोरेज क्षमता बढ़ाने की योजना की गति धीमी।
  • सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को संतुलित करने में दिक्कत।
  • पीक डिमांड के समय बिजली आपूर्ति मैनेज करना चुनौतीपूर्ण ।
  • प्रस्तावित हजारों करोड़ रुपए के निवेश पर असर, प्रभावित होने की आशंका।

जिम्मेदार ये बोले…

पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में शुरुआत में तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं का आकलन किया जाता है। कंपनियां खुद स्थान चुनती हैं, लेकिन कई बार व्यवहार्यता (फिजिबिलिटी) नहीं मिलने से प्रोजेक्ट रुक जाते हैं। कुछ कंपनियां अब वैकल्पिक जगह तलाश रही हैं। निगम भी निवेशकों को सहयोग देकर समाधान निकाला जा रहा है।
-रोहित गुप्ता, एमडी, राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम