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Jaipur: विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडे की स्मृति में हुआ कार्यक्रम, जयपुर के महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में गूंजते रहे ‘एड गुरु’ के स्लोगन

Program In Memory Of Indian Adman Piyush Pandey: कार्यक्रम में जब पीयूष पांडे की बहन रमा पांडे ने कहा कि 'जान तो सभी की जाती है इस शान से कोई मक्तल से गया। वो शान अदब निराली है। जाने की बात को क्या कहिए, ये जान तो आनी जानी है', तो हर कोई पीयूष की याद में खोया नजर आया।

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कार्यक्रम में मौजूद पीयूष पांडे की तीनों बहनें रमा, तृप्ति, इला (फोटो: पत्रिका)

Advertising Legend Piyush Pandey: विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडे के दोस्तों, परिजन, प्रशंसकों और क्लाइंट्स से भरे ऑडिटोरियम में गूंजते शब्द और वीडियो लोगों को कभी हंसा रहे थे तो कभी आंखों को नम कर रहे थे। यहां गूंजती उनके विज्ञापन की पंक्तियां 'जाने क्या दिख जाए…, हर घर कुछ कहता है…, कुछ मीठा हो जाए…, मिले सुर मेरा तुम्हारा…, फेविकोल का जोड़ टूटेगा नहीं…' यह एहसास करवा रही थीं कि पीयूष हमारे बीच ही मौजूद हैं। पीयूष पांडे की याद में शुक्रवार को महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

कार्यक्रम में जब पीयूष पांडे की बहन रमा पांडे ने कहा कि 'जान तो सभी की जाती है इस शान से कोई मक्तल से गया। वो शान अदब निराली है। जाने की बात को क्या कहिए, ये जान तो आनी जानी है', तो हर कोई पीयूष की याद में खोया नजर आया।

रमा ने कहा कि वह यही कहीं मेरे पास हैं। मैं जिस्म में उनको ढूंढ़ती, वो बन गए एहसास है। वह लोगों के मन की बात जानते थे और उसी को संवाद बनाते थे। जयपुर की मिट्टी से हमारे परिवार का गहरा लगाव है। उन्होंने राजस्थानी मिट्टी को कई विज्ञापन दिए। मैं विज्ञापन को साहित्य की विधा बनाना चाहती हूं। कार्यक्रम के दौरान 'हां भाई पार्टनर फ्रंट फुट पर खेलो…' लाइन गूंजती रही। इस दौरान एक स्कूल की गर्ल्स ने बैंड परफॉर्मेंस भी दी।

मैं कहती, मत आना इसे लेने

कार्यक्रम में तृप्ति पांडे ने कहा कि पीयूष हमारा लीडर था। उसके साथ हम पतंगें उड़ाते थे। उसकी पतंग कटने पर मैं लूटने जाती थी। वह गणित में कमजोर था। काश, मैं ऊपर वाले से कह पाती कि मत आना इसको लेने। जब पीयूष ने 'मिले सुर मेरा…' विज्ञापन किया तो मुझे राजस्थान में एक कुआं ढूंढ़ने के लिए कहा। उसको राजस्थान से बहुत प्यार था। उसने 'जाने क्या दिख जाए…' विज्ञापन से राजस्थान में ऐसा जादू चलाया कि आज भी यह लाइन लोगों के दिल में जगह बनाए हुए है।

जाने क्या दिख जाए …

पीयूष पांडे के भाई प्रसून ने कहा कि उनकी क्रिएटिविटी कमाल की थी। उनसे हर कोई व्यक्ति बहुत जल्दी कनेक्ट हो जाता था। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री थी, तब पीयूष पांडे से कई बार मिलना हुआ। उनके विज्ञापन 'जाने क्या दिख जाए…' से राजस्थान के पर्यटन को अलग पहचान मिली। उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि पीयूष पांडे जिंदादिली के मिसाल थे। पांडे वह शख्स थे जिन्होंने विज्ञापनों को भारतीय बनाया।

ये आंसू तुम्हारे नाम के हैं

अभिनेत्री इला अरुण ने कहा कि 'मुझे अच्छा लगता है जब तुम्हारी याद में मेरी आंख से आंसू ढुलकते हैं। ये आंसू तुम्हारे नाम के हैं, स्वाभिमान के हैं। ये आंसू सुख के हैं, दुख के हैं….'। पीयूष कहते थे कि 'वी आर टीम इलेवन'। वह मेरे साथ मुंबई में 5 वर्ष रहे, तब मैंने उनके व्यक्तित्व को समझा। मां-बाप के जाने के बाद पीयूष हमारे लिए बरगद बन गए और हम उनकी छांव में पनपने लगे।

मामाओं की रेपुटेशन को सुधारना है…

पीयूष के दोस्त प्रभात दयाल ने कहा कि इस फैमिली से मैं तीन पीढ़ियों से जुड़ा हूं। अभिजीत अवस्थी ने कहा कि पीयूष मामा के जीवन का लक्ष्य था कि मामाओं की रेपुटेशन को सुधारना। उन्होंने हमें सिखाया कि कब फ्रंट फुट पर खेलना है और कब बैंक फुट पर।

जीवन से जुड़े कई पहलुओं को दिखाया

कार्यक्रम में वीडियो के माध्यम से पीयूष पांडे के विज्ञापनों को दिखाया गया। 'कुछ खास है हम सभी में… वीडियो में उनके जीवन से जुड़े कई पहलुओं को दिखाया गया, जिसमें वे क्रिकेट खेलते, परिवार के साथ बिताए पल, डांस करते आदि शामिल थे। ओ पीयूष मूंछों वाले पांडे साहब…' गाने पर उनके बनाए हुए कई विज्ञापनों को अलग अंदाज में प्रस्तुत किया गया।

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