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परीक्षा से पहले बीस रुपए में बिका पेपर! आधी रात तक चलता रहा पेपर खरीदने का सिलसिला

जिन विद्यार्थियों के प्रश्न पत्र हाथ आया उन्होनें मोबाइल में प्रश्न पत्र की फोटो लेकर व्हाटसअप से अपने सार्थियों को भेजा..

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जयपुर

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Dinesh Saini

Mar 12, 2018

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जयपुर/दौसा राजस्थान विश्वविद्यालय की आज से शुरू हुई यूजी की परीक्षाओं का प्रश्न पत्र देर रात तक खूब बिका। हालांकि यह प्रश्न पत्र गैस पेपर के नाम से था लेकिन दुकान पर पेपर बेच रहे विक्रेताओं ने प्रश्न पत्र में से आधे से ज्यादा प्रश्न मिलने का दावा कर गैस पेपर को जमकर बेचा। यही नहीं जैसे-जैसे परीक्षार्थियों को पेपर बिकने का पता चला वैसे-वैसे ही विद्यार्थी अपनी परीक्षा की तैयारियों को छोड़ कर प्रश्न पत्र खरीदने के लिए उमड़ गए। जिससे वहां सडक़ पर भी घंटो तक जाम लग गया और बाजार में परीक्षार्थियों का मेला सा लग गया।


दौसा जिले का यह मामला बस स्टैंड से सोमनाथ चौराहे की ओर जाने वाले रास्ते में स्थित तिवाड़ी धर्म कांटे के सामने स्थित स्टेशनरी की दुकानों का है जहां बीस रुपए में हजारों विद्यार्थियों को यह प्रश्न पत्र बेचा गया।


लाइन में नम्बर नहीं आया तो व्हाटसअप से भेजा साथियों को पेपर
प्रश्न पत्र बिकने की सूचना पर परीक्षार्थियों की दुकानों के बाहर लम्बी लाइन लग गई। प्रश्न पत्र विक्रेता भी गैस पेपर की फोटोकॉपी कर विद्यार्थियों को बेचते रहे। यह खेल आधी रात तक चलता रहा। ऐसे में लंबी लाइन में लगे विद्यार्थियों को घंटो तक प्रश्न पत्र खरीदने के लिए इंतजार करना पड़ा। लेकिन जिन विद्यार्थियों के प्रश्न पत्र हाथ आया उन्होनें मोबाइल में प्रश्न पत्र की फोटो लेकर व्हाटसअप से अपने सार्थियों को भेजा।


परीक्षार्थियों ने भी 10-10 रुपए में बेचा पेपर
कुछ परीक्षार्थियों ने तो दुकाने के बाहर खुद पेपर खरीद कर दूसरे परीक्षार्थियों को दस दस रुपए में पेपर की फोटो खिंचने का अवसर दे दिया। जिससे परीक्षार्थियों ने लाइन से निकलकर मोबाइल में दस दस रुपए देकर प्रश्न पत्र के फोटो खिंच लिए।


विश्वविद्यालय के दावे हुए फेल
राजस्थान विश्वविद्यालय के परीक्षाओं में सुरक्षा संबंधी दावे फेल हो गए है। गत वर्ष भी एसओजी ने इसी तरह गैस पेपर बांटने वाले और पेपर लीक करने वाले विश्वविद्यालय के कर्मचारियों व शिक्षकों पर कार्रवाई करते हुए एक बड़े गिरोह को पकड़ा था। लेकिन यह खेल इस बार परीक्षाएं शुरु होते ही फिर से शुरू हो गया। ऐसे में विश्वविद्यालय की ओर से प्रश्न पत्रों लीक नहीं होने के दावे खोखले साबित हो रहे है। क्योकि विक्रेता प्रश्न पत्र में आधे से ज्यादा प्रश्न मिलने का दावा कर रहे है। ऐसे में अगर गैस पेपर से ऑरिजनल प्रश्न पत्र मिलते है तो फिर से कही विश्वविद्यालय की कर्मचारियों केी मिलीभगत का खेल उजागर हो सकता है।