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राहुल गांधी के कोटा दौरे से पहले हटाए जा रहे होर्डिंग्स, कांग्रेस ने कहा- बीजेपी सरकार की नींद उड़ गई

Rahul Gandhi Kota Visit : 17 जून को राहुल गांधी की प्रस्तावित 'छात्रों की गूंज' महारैली से पहले राजस्थान की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने पोस्टर हटाने और कोचिंग संस्थानों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं, जबकि भाजपा ने इन्हें पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए पलटवार किया है। पेपर लीक और युवाओं के मुद्दों को लेकर कोटा में होने वाली यह रैली अब सियासी टकराव का केंद्र बन गई है।

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जयपुर

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Kamal Mishra

Jun 16, 2026

Rahul Gandhi Poster

Rahul Gandhi: कोटा में राहुल गांधी की रैली से पहले हटाए जा रहे होर्डिंग्स (फोटो-पत्रिका नेटवर्क)

जयपुर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 17 जून को होने वाले कोटा दौरे से पहले राजस्थान की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी की कोटा के दशहरा मैदान में प्रस्तावित 'छात्रों की गूंज' महारैली से घबराई भाजपा सरकार पोस्टर-बैनर हटवा रही है और कोचिंग संस्थानों, पीजी व गेस्ट हाउस संचालकों पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि छात्र कार्यक्रम में शामिल न हो सकें। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और कांग्रेस की राजनीतिक हताशा करार दिया है।

बताया जा रहा है कि कोटा नगर निगम की तरफ से बगैर अनुमति होर्डिंग्स लगाए गए थे, जिसके बाद इनको हटा दिया गया।

दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर युवाओं और Gen-Z को संबोधित करते हुए कहा कि देश के हर शहर, कस्बे और गली से उठ रही छात्रों की आवाज को कोटा में एक बड़ी हुंकार में बदलने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल छात्रों की नहीं, बल्कि देश के भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने मोदी सरकार पर पेपर लीक, रद्द होती भर्तियों और परीक्षा कुप्रबंधन के जरिए युवाओं के सपनों को तोड़ने का आरोप लगाया।

अशोक गहलोत ने क्या कहा?

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी राहुल गांधी के कोटा दौरे को युवाओं की आवाज से जोड़ते हुए कहा कि देशभर में लगातार पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों से युवाओं का व्यवस्था पर से विश्वास उठ चुका है। उन्होंने कहा कि कोटा जैसे बड़े कोचिंग हब से इस अभियान की शुरुआत होना महत्वपूर्ण है। गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।

गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जैसे लोकसभा अध्यक्ष और कोटा सांसद ओम बिरला खुद इस दौरे के खिलाफ हों। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों और अन्य लोगों को डराने-धमकाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक संकेत नहीं हैं।

बीजेपी सरकार की नींद उड़ी-कांग्रेस

इधर कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से भी दावा किया गया कि भाजपा सरकार राहुल गांधी के पोस्टर और बैनर हटवाकर छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने कहा कि युवाओं की आवाज को किसी भी कीमत पर नहीं दबाया जा सकता। BJP सरकार की नींद उड़ चुकी है।

राहुल गांधी क्या बोले?

खुद राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश के हर युवा का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन मोदी सरकार की नीतियों के कारण पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, बढ़ती फीस, निजीकरण और घोटालों से करोड़ों युवाओं के सपने टूट रहे हैं। उन्होंने युवाओं से 17 जून को कोटा में आयोजित 'छात्रों की गूंज' महारैली में शामिल होने की अपील की।

राजेंद्र राठौड़ ने आरोपों को हास्यास्पद बताया

वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कांग्रेस के आरोपों को हास्यास्पद बताया। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत को यह बताना चाहिए कि उनके पास ओम बिरला के खिलाफ लगाए गए आरोपों के क्या सबूत हैं। राठौड़ ने कहा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर इस तरह के आरोप लगाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का किसी राजनीतिक कार्यक्रम का स्वागत करना कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है।

निर्मल चौधरी ने उठाए सवाल

इस बीच कांग्रेस के युवा नेता निर्मल चौधरी ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर भाजपा को राहुल गांधी से डर नहीं है तो फिर पोस्टर हटवाने और कार्यक्रम को लेकर दबाव बनाने जैसी शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पोस्टर हटाए जा सकते हैं, लेकिन लाखों छात्रों के सवालों को नहीं मिटाया जा सकता।

राहुल गांधी की रैली क्यों है खास?

राहुल गांधी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में बना हुआ है। ऐसे में कोटा की यह महारैली राजस्थान ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम संदेश देने वाली मानी जा रही है।