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Rajasthan : 1 अप्रेल से राजस्थान में लागू होगी कचरा संग्रहण की नई व्यवस्था, लेकिन जयपुर में तैयारियां है अदृश्य, जानें नए नियम

Rajasthan : जयपुर सहित राजस्थान के अन्य निकायों में एक अप्रेल से ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2026 लागू हो जाएगा। लेकिन जयपुर नगर निगम में इसकी तैयारियां अब तक शुरू नहीं हुई हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

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Rajasthan 1 April New system garbage collection implemented But preparations are invisible

फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan : जयपुर सहित राजस्थान के अन्य निकायों में एक अप्रेल से ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2026 लागू हो जाएगा। लेकिन जयपुर नगर निगम में इसकी तैयारियां अब तक शुरू नहीं हुई हैं। नए नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्देश दिए हैं।

राजधानी जयपुर में जो हूपर चल रहे हैं, उनमें फिलहाल केवल 2 कम्पार्टमेंट हैं। नए नियमों के अनुसार चार तरह का कचरा अलग-अलग लेना निकायों की प्राथमिकता है। लेकिन जयपुर में संचालित हूपर्स में अभी गीला और सूखा कचरे के लिए ही बॉक्स हैं। कुछ वाहनों में खानापूर्ति के लिए एक छोटा बॉक्स भी लगा रखा है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश : सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2026 लागू करें

भोपाल के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट-2026 को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश केंद्र, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वच्छता और स्वस्थ पर्यावरण संविधान के अनुच्छेद-21 (जीवन के अधिकार) का हिस्सा है, इसलिए कचरा प्रबंधन में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

क्या किया जाना है

1- कचरे का स्रोत पर पृथक्करण सुनिश्चित करना होगा।
2- 4 प्रकार के कचरे के लिए अलग-अलग कलेक्शन सिस्टम बनाना होगा।
3- आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर और कलेक्शन वाहन तैयार करने होंगे।
4- जिला कलेक्टर वेस्ट मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का ऑडिट कर रिपोर्ट देंगे।
5- सभी स्थानीय निकायों को 100 फीसदी अनुपालन की समयसीमा तय करनी होगी।

दो ही कम्पार्टमेंट, बाकी की खानापूर्ति

जयपुर के ज्यादातर जोन में कचरा संग्रहण की व्यवस्था निजी कंपनियों के हाथों में है। यहां चल रहे हूपर्स में केवल दो कम्पार्टमेंट हैं। बाकी दो कम्पार्टमेंट के नाम पर छोटे-छोटे बॉक्स लगाकर खानापूर्ति की जा रही है।

चार बॉक्स क्यों जरूरी?

1- गीला कचरा : रसोई और जैविक कचरा।
2- सूखा कचरा : प्लास्टिक, कागज, धातु आदि।
3- सैनिटरी कचरा : डायपर, सैनिटरी पैड।
4- विशेष/खतरनाक कचरा : दवाइयां, केमिकल, बल्ब आदि।

कार्यशाला में पढ़ाया स्वच्छता का पाठ

स्वच्छता के ब्रांड एम्बेसडर केके गुप्ता मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि बाजारों में नाइट स्वीपिंग नियमित होनी चाहिए। हर व्यापारी अपने प्रतिष्ठान के बाहर कचरा पात्र रखे और प्रतिष्ठान बंद होने से पहले कचरा उठे, इसका निगम ध्यान रखे। सार्वजनिक टॉयलेट भी साफ होने चाहिए।

एक अप्रेल तक यदि गाइडलाइन के हिसाब से बदलाव नहीं तो कार्रवाई

नई गाइडलाइन के अनुसार कचरा संग्रहण करने वाली कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं। कुछ हूपर्स पर चार कम्पार्टमेंट भी हैं, उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए कहा गया है। एक अप्रेल तक यदि गाइडलाइन के हिसाब से बदलाव नहीं किया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
ओम थानवी, उपायुक्त, शाखा

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