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Rajasthan Election 2023 : राजस्थान में बीजेपी के उम्मीदवारों की सूची जारी होने में हो रही देरी, सामने आई ये वजह

Rajasthan Assembly Election 2023: विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी पैनल पर प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेताओं की आपसी खींचतान से परेशान आलाकमान ने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष को मंगलवार को जयपुर भेजा।

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जयपुर

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Kirti Verma

Oct 04, 2023

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जयपुर. Rajasthan Assembly Election 2023: विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी पैनल पर प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेताओं की आपसी खींचतान से परेशान आलाकमान ने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष को मंगलवार को जयपुर भेजा। वे शाम को प्रदेश भाजपा कोर कमेटी की बैठक में शामिल हुए। यहां दिल्ली से भेजे गए फार्मूले तु के अनुसार उन सीट और प्रत्याशियों के नाम पर लम्बी मंत्रणा हुई, जिसे पहली सूची में शामिल किया जाना है। शीर्ष हु नेताओं के बीच आपसी सहमति बनाने के प्रयास किए गए। सूत्रों के मुताबिक पहली सूची में कुछ सीटों को छोड़कर लगभग सहमति बन गई है। अब आलाकमान के पास केवल एक सूची जाएगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा बुधवार को जयपुर आएंगे और उन्हें भी इस बैठक का रिजल्ट बताना है। इसी कारण प्रत्याशियों की पहली सूची के लिए यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। सूत्रों के मुताबिक टिकटों की अब जो सूची तैयार हो रही है, उसमें संघ की भूमिका मुख्य रूप से होगी। कुछ नेता सुबह अम्बाबाडी में संघ के स्वास्तिक भवन पहुंचे और संघचालक से लम्बी मंत्रणा की। अभी 65 में से 40-45 सीट की लिस्ट तैयार होगी। पहले यह बैठक भाजपा कार्यालय में होनी थी, लेकिन एनवक्त पर स्थान बदलकर वैशाली नगर इलाके में की गई।


ये सीट कतार में.
सरदारशहर, सुजानगढ़, अंता, हवामहल, आदर्श नगर, बानसूर, अलवर ग्रामीण, बांदीकुई, दूदू, तिजारा, बिलाड़ा, झुंझुनूं, डूंगरगढ़, सादुलपुर, डूंगरपुर, कोटपूतली, मांडल, कोलायत, भादरा, गंगानगर, बायतू, खेरवाड़ा, नाथद्वारा, सहाड़ा, सीकर, बामनवास, सवाईमाधोपुर, टोंक, मसूदा, केकड़ी।

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इस खामी पर नाराज था आलाकमान
दिल्ली में केन्द्रीय चुनाव समिति की हुई बैठक में प्रदेश के कुछ शीर्ष नेताओं ने अलग-अलग सूची सौंपी। इसमें आपसी तालमेल का अभाव रहा और उसमें कई सीट पर 'अपनों' के नाम लिख दिए गए। आलाकमान की सूची से भी ज्यादातर नाम मैच नहीं हुए। एकजुट होकर प्रत्याशी पैनल सूची तैयार नहीं की गई।

बड़े नेताओं को बनाएंगे रणनीतिकार!
पार्टी आलाकमान संकेत दे चुका है कि अब कुछ शीर्ष नेता चुनाव लड़ने की बजाय रणनीतिकार की भूमिका में आएं। इनमें वरिष्ठ नेता और सांसद भी हो सकते हैं। ऐसे कुछ नेताओं की नींद उड़ी हुई है, जो खुद के नाम को इस संकेत से जोड़कर देख रहे हैं।


फॉर्मूला और चयन की प्रक्रिया
- प्रत्याशी की अधिकतम उम्र सीमा 75 वर्ष।
- बागी होकर वापस पार्टी में लौटे नेताओं को चुनाव लड़ाने का क्या फॉर्मूला हो ।
- खींचतान बंद, केवल आपसी समन्वय से आगे बढ़ना ।
- चिह्नित सांसदों के लिए विधानसभा सीट चयन ।

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पहले इन पर चल रही नाम की माथापच्ची
तिजारा, लक्ष्मणगढ़-राजगढ़, बागीदोरा, कुशलगढ़, शिव, बाड़मेर, गुढ़ामालानी, चौहटन, कामां, डीग- कुम्हेर, हिण्डोली, महुआ, सिकराय, दौसा, लालसोट, बाड़ी, राजाखेड़ा, सागवाड़ा, चौरासी, कोटपूतली, बस्सी, सांचौर, मंडावा, नवलगढ़, उदयपुरवाटी, खेतड़ी, ओसियां, सरदारपुरा, लूनी, टोडाभीम, हिण्डौन, करौली, सपोटरा, लाडनूं, डीडवाना, खींवसर, धोद, दांतारामगढ़, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, वल्लभनगर ।