
जयपुर।
राजस्थान में चुनावी वर्ष में भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। केंद्रीय संगठन की हरी झंडी के बाद चित्तौड़गढ़ से सांसद सीपी जोशी को प्रदेशाध्यक्ष पद की कमान सौंपी गई है। सांसद जोशी अब निवर्तमान हो रहे प्रदेशाध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया की जगह लेंगे। पेश हैं सांसद सीपी जोशी से जुड़ी 10 बड़ी बातें -
1. मोदी-शाह-नड्डा की 'गुड़ बुक्स' में है नाम सांसद सीपी जोशी को राजनीति का लंबा तज़ुर्बा है, साथ ही केंद्रीय स्तर के नेताओं के बीच अच्छी पैठ भी है। वे भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'गुड बुक्स' के नेताओं में भी शामिल हैं।
2. जीत चुके हैं कांग्रेस का गढ़ सांसद सीपी जोशी चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट से सबसे पहली बार वर्ष 2014 में सांसद बने थे। उन्होंने कांग्रेस के इस गढ़ से संसद गिरिजा व्यास को शिकस्त देकर संसद का टिकट कटवाया था।
3. दूसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने सांसद सीपी जोशी पर ही फिर से भरोसा जताया। इधर सांसद जोशी भी इस भरोसे पर खरे उतरे और इस सीट से दोबारा जीत हासिल की। भीलवाड़ा सीट पर सांसद सुभाष बहेरिया के सबसे बड़ी चुनावी जीत दर्ज करने के बाद चित्तौड़गढ़ सीट पर सांसद सीपी जोशी ने दूसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी।
4. जोशी ने प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार गोपाल सिंह शेखावत को 5 लाख 76 हज़ार 247 वोट से जीत दर्ज की थी। जोशी को जहां 9 लाख 82 हज़ार 942 वोट हासिल हुए थे, वहीं कांग्रेस उम्मीदवार गोपाल सिंह को 4 लाख 6 हज़ार 695 वोट हासिल हुए थे।
5. युवा मोर्चे की संभाल चुके कमान सांसद जोशी अपने राजनीतिक कार्यकाल में राजस्थान प्रदेश के भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष पद की कमान भी संभाल चुके हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संगठन को ना सिर्फ सक्रिय रखा बल्कि कई नवाचार भी किये।
6. कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे छात्र राजनीति से अपना राजनीतिक जीवन शुरू करने वाले जोशी भदेसर पंचायत समिति में उप प्रधान रहे। उसके बाद वे भाजपा के जिलाध्यक्ष बने। जिलाध्यक्ष रहते हुए उन्हें पार्टी ने चित्तौडग़ढ़ से सांसद का टिकट देकर चुनाव लड़ाया था।
7. जोशी वर्तमान में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। अब उन्हें प्रमोट करके अध्यक्ष की कमान थमाई गई है। माना जा रहा है कि जोशी के नाम पर ब्राह्मण चेहरा चुनकर पार्टी ने ब्राह्मण वोट बैंक को अपनी ओर खींचने की कवायद की है।
8. भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पद पर सीपी जोशी के नाम के सामने इस पद पर कई और वरिष्ठ नेताओं की भी दावेदारी थी। पार्टी गलियारों में जो नाम चल रहे थे उनमें केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत, पूर्व सांसद नारायण पंचारिया सरीखे नाम शामिल थे। लेकिन पार्टी ने सीपी जोशी के नाम पर ही लगाई।
9. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अब जोशी के लिए आने वाला समय चुनौती भरा रहेगा। पार्टी की गुटबाजी को खत्म करने की सबसे बड़ी चुनौती उनके सामने हैं। इसके बाद साल के आखिर में विधानसभा और अगले साल लोकसभा चुनाव हैं। ऐसे में गुटबाजी को खत्म करके भाजपा को जीत दिलाने की चुनौती उनके सामने रहेगी।
10. सांसद जोशी फिलहाल किसी एक गुट से सीधे-सीधे जुड़ाव नहीं रखते हैं। उनके पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और निवर्तमान हो रहे प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया सहित लगभग सभी नेताओं से मधुर संबंध हैं।
Published on:
23 Mar 2023 02:06 pm
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