
कांग्रेस-भाजपा (फाइल फोटो: पत्रिका)
जयपुर। राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। टिकट वितरण से लेकर यूजीसी से जुड़े मुद्दे तक सवर्ण समाज की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में विरोध-प्रदर्शन, बाइक रैलियों और बैठकों के जरिए समाज के लोग दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के भाजपा-कांग्रेस के बहिष्कार के ऐलान ने इस राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।
दरअसल, यूजीसी एक्ट, एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण में सुधार जैसी मांगों को लेकर देशभर में आंदोलन चल रहा है। खास तौर पर यूजीसी से जुड़े प्रावधानों को लेकर सवर्ण समाज के एक वर्ग में नाराजगी है। आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि मौजूदा प्रावधान शिक्षा व्यवस्था के माहौल पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं। इसी मुद्दे को लेकर राजस्थान में भी विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
अब यह असंतोष नगर निकाय चुनाव में राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। कई जगह सवर्ण समाज के लोग भाजपा और कांग्रेस से दूरी बनाने तथा निर्दलीय प्रत्याशियों को समर्थन देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
आबूरोड नगरपालिका चुनाव में टिकट वितरण को लेकर ब्राह्मण समाज ने भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित परशुराम भवन परिसर में जुटे समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि जनाधार होने के बावजूद टिकट वितरण में ब्राह्मण समाज की उपेक्षा की गई।
प्रदर्शनकारियों ने इस मामले में भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए टिकट वितरण की विस्तृत जांच की मांग की। साथ ही भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी और कांग्रेस जिलाध्यक्ष लीलाराम को पद से हटाने की मांग भी उठाई गई। समाज के लोगों का कहना है कि इस संबंध में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को भी अवगत कराया जाएगा।
गंगापुर सिटी में सवर्ण समाज ने भाजपा, कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। समाज की ओर से निर्दलीय प्रत्याशियों के समर्थन में अभियान भी शुरू कर दिया गया है। बुधवार को वार्ड नंबर 30 स्थित हनुमान मंदिर से बाइक रैली निकाली गई।
रैली से पहले सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इसके बाद मुख्य बाजार से होते हुए रैली वार्ड नंबर 35 स्थित समिति कार्यालय पहुंची। इस दौरान यूजीसी से जुड़े कानून के विरोध में सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
सवर्ण समाज के प्रवक्ता वेदप्रकाश मंगल के अनुसार, विभिन्न वार्डों से तीन दर्जन से ज्यादा निर्दलीय प्रत्याशियों ने समर्थन के लिए समिति से संपर्क किया है। आवेदन लेने की प्रक्रिया 3 सितंबर तक चलेगी और 4 सितंबर को समिति इन आवेदनों पर फैसला करेगी। समर्थित प्रत्याशियों के पक्ष में नुक्कड़ सभाओं, आमसभाओं और अन्य कार्यक्रमों के जरिए प्रचार की तैयारी है।
इसी बीच श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने बीकानेर में भाजपा और कांग्रेस के बहिष्कार का ऐलान कर राजनीतिक संदेश को और मुखर कर दिया। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज लंबे समय से दोनों दलों का परंपरागत वोटर रहा है, लेकिन अब समाज अपने वोट की ताकत का एहसास कराएगा।
मकराना ने यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही और सरकार को चेतावनी दी कि मांग पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
निकाय चुनाव से पहले सवर्ण समाज की नाराजगी राजनीतिक बहस के केंद्र आ गई है। हालांकि इसका चुनावी असर कितना होगा, यह मतदान और नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि भाजपा और कांग्रेस के लिए निकाय चुनाव से पहले यह असंतोष नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
Updated on:
02 Sept 2026 07:36 pm
Published on:
02 Sept 2026 07:33 pm
