
राजस्थान में सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक ऐतिहासिक और बेहद सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने सरकारी तंत्र में बैठे 'सफेदपोश' अपराधियों और लापरवाह अधिकारियों की लंबी कुंडली खंगालते हुए अभियोजन स्वीकृति और विभागीय जांच के 50 से अधिक प्रकरणों का एक साथ निस्तारण कर दिया।
इस कार्रवाई की जद में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक बड़े अधिकारी से लेकर उपखंड अधिकारी (SDM), विकास अधिकारी और सचिव स्तर के कार्मिक आए हैं। सरकार के इस 'क्लीनअप ऑपरेशन' से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने सुशासन की मिसाल पेश करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक अधिकारी के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के परामर्श से दण्ड की मात्रा बढ़ाने का कड़ा निर्णय लिया है। इसके साथ ही, निजी व्यक्तियों को अवैध लाभ पहुँचाने के आरोप में तत्कालीन उपखंड अधिकारी (SDM) सहित सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) दे दी गई है। अब इन अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में मुख्यमंत्री ने 'अंतिम प्रहार' करते हुए कई अधिकारियों का करियर खत्म कर दिया है।
राज्य सेवा के अधिकारियों में अनुशासन का पाठ पढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने सीसीए नियम-16 के तहत कड़़ी शास्ति लगाई है।
मुख्यमंत्री कार्यालय में जब सजा के खिलाफ अधिकारियों ने अपील पेश की, तो मुख्यमंत्री ने उनमें से 4 अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया। केवल एक मामले में परिस्थितियों को देखते हुए दण्ड की मात्रा कम की गई।
भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट कर दिया था कि वे भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' रखेंगे। 50 से अधिक फाइलों का एक झटके में निस्तारण करना यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री सचिवालय अब भ्रष्ट अधिकारियों के लिए 'सेफ हेवन' नहीं रहा। आमजन को संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन देने के लिए सरकार अब निचले स्तर से लेकर शीर्ष अधिकारियों तक की जवाबदेही तय कर रही है।
Updated on:
10 Mar 2026 02:16 pm
Published on:
10 Mar 2026 02:16 pm
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