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राजस्थान में अभी नहीं होगा मंत्रिमंडल विस्तार, बसपा विधायकों का अभी मंत्री बनना मुश्किल!

प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने साफ किया है कि फिलहाल निकाय चुनाव से पहले कोई विस्तार नहीं होगा, चुनाव से पहले राजनीतिक नियुक्तियां देकर कार्यकर्ताओं में जोश भरने की तैयारी
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जयपुर

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Pushpendra Singh Shekhawat

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Updated: 20 Sep 2019, 9:52 PM IST

jaipur

राजस्थान में अभी नहीं होगा मंत्रिमंडल विस्तार, बसपा विधायकों का अभी मंत्री बनना मुश्किल

जयपुर। राजस्थान कांग्रेस ( Rajasthan Congress ) में जल्द मंत्रिमण्डल विस्तार की चल रही अटकलों को लेकर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ( Avinash Pandey ) ने साफ किया है कि फिलहाल निकाय चुनाव से पहले कोई विस्तार नहीं होगा। निकाय चुनाव में मंत्रियों और विधायकों की परफॉर्मेंस के आधार पर ही पदोन्नत किया जाएगा। बसपा विधायकों ( BSP MLA ) को मंत्री बनाए जाने को लेकर कहा कि वे बिना शर्त पार्टी में शामिल हुए हैं। अगर सरकार को जरूरत होगी, तो उन्हें भूमिका दी जा सकती है। यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। साफ कहा कि बसपा विधायकों को राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की सहमति के बाद ही शामिल किया गया है।


नई दिल्ली में कुछ दिनों पहले ही सोनिया गांधी ( Sonia Gandhi ) से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( CM Ashok Gehlot ) और उप मुख्यमंत्री व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ( Sachin Pilot ) की हुई मुलाकात के बाद सत्ता और संगठन में तालमेल बनता नजर आ रहा है। इसके चलते अब राज्य सरकार एक माह में बड़े स्तर पर राजनीतिक नियुक्तियां ( Political Appointment ) देने की तैयारी में जुट गई है। नियुक्तियां देने को लेकर जिलों से प्रभारी मंत्री और संगठन प्रभारी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और पदाधिकारियों से चर्चा कर नाम लेंगे। यह प्रक्रिया 15 अक्टूबर तक पूरी की जा सकती है। इसके बाद इन सूचियों को मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और प्रदेश प्रभारी अविनाश पाण्डे अंतिम रूप देंगे। बाद में सोनिया गांधी की सहमति लेकर सूचिया जारी की जाएंगी।

सूत्रों के मुताबिक यह निर्णय एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और प्रदेश प्रभारी की मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक में किया गया है। बताया जा रहा है कि अब इन तीनों की समन्वय समिति बड़े फैसलों में शामिल होगी। पाण्डे पहले ही कह चुके हैं कि प्रदेश में ब्लॉक स्तर तक एक लाख से ज्यादा पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्ति देकर सत्ता में भागीदार बनाया जाएगा।