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‘BJP सरकार की मिलीभगत ने बच्चों की जान ली’, डोटासरा ने लगाए गंभीर आरोप; मां को दोषी बताने पर सुनाई खरी-खोटी

Rajasthan Cough Syrup Case: राजस्थान में सरकारी योजना के तहत वितरित कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत और बीमारी के मामलों ने विवाद खड़ा कर दिया है।

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Govind Singh Dotasara

फोटो- पत्रिका नेटवर्क

Rajasthan Cough Syrup Case: राजस्थान में सरकारी योजना के तहत वितरित कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत और बीमारी के मामलों ने विवाद खड़ा कर दिया है। अब तक तीन बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद दवा की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। पीसीसी प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है।

वहीं, स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने दावा किया कि दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसकी जांच करवाई जा चुकी है। जांच रिपोर्ट में दवा के सभी सॉल्ट्स की मात्रा मानक के अनुरूप पाई गई और किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया गया। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की एक रिपोर्ट में कहा गया कि कफ सिरप डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब नहीं किया गया था।

वहीं, सीकर के एक मामले में डॉक्टर द्वारा दवा प्रिस्क्राइब करने की बात सामने आई है, जिसके बाद फार्मासिस्ट और डॉक्टर पर कार्रवाई की बात कही जा रही है। बता दें, भरतपुर और सीकर में डेक्सट्रोमेथारपन कफ सिरप के सेवन से दो बच्चों की मौत हुई थी। सीकर के हाथीदेह पीएचसी में एक बच्चे को यह प्रतिबंधित दवा दी गई थी, जिसका मामला अब जांच के दायरे में है।

डोटासरा ने साधा निशाना

पीसीस चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने राजस्थान पत्रिका की खबर शेयर करते हुए कहा कि जमीर मारकर कुर्सियों से चिपके हुए लोग, जब सत्ता में बैठें हो तो शर्म और संवेदना कहां बचेगी! जिस मां की गोद उजड़ गई, जिसका कलेजा छिन गया, भाजपा सरकार उस मां को अपने बच्चे की मौत का जिम्मेदार बता रही है। शर्मनाक!

उन्होंने कहा कि क्या उस मां का यही गुनाह है कि उसने डॉक्टर के कहने पर सरकारी अस्पताल से मिली दवा अपने बच्चे को पिलाई? 3 मासूमों की जान चली गई, कई बच्चों की किडनी हमेशा के लिए खराब हो गई और भाजपा की संवेदनहीन सरकार अब भी कुतर्क करने में लगी है।

Kaysons Pharma कंपनी पर उठाए सवाल

गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि जिस कफ सिरप ‘डेक्स्ट्रोमेथोर्फन हाइड्रोब्रोमाइड’ से बच्चों की जान गई, वो पहले से ही ब्लैकलिस्टेड थी। जिस Kaysons Pharma कंपनी को नकली दवाएं बनाने के आरोप में बैन किया गया, उसी की दवा सप्लाई हो रही है। बैन के बावजूद जहरीली दवा राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना’ के तहत बांटी जाती रही।

उन्होंने कहा कि पूरा मामला सामने आ गया तो सरकार बच्चों की मां को दोषी बताकर दवा कंपनी को बचाने में लगी है, उसे क्लीन चिट दे रही है। भाजपा सरकार की मिलीभगत, भ्रष्टाचार और लापरवाही ने बच्चों की जान ली है। हत्या के गुनहगारों को कड़ी सज़ा और ज़हर बांटने वाले जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।