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राजस्थान में ड्रग्स का बढ़ता खतरा: 3 साल में 40% बढ़े NDPS केस, शहर से गांव तक फैली सप्लाई चेन

राजस्थान में नशे का कारोबार किस हद तक फैल चुका है, इसका अंदाजा पुलिस रिकॉर्ड और बरामदगी के आंकड़े देते हैं। पिछले तीन साल (2022-2024) में एनडीपीएस ए€क्ट के तहत दर्ज मामलों में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
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जयपुर

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Arvind Rao

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Updated: 11 Dec 2025, 10:15 AM IST

Rajasthan Drugs NDPS Cases

तस्करों के नेटवर्क के साथ बढ़ रही सप्लाई चेन (फोटो- पत्रिका)

जयपुर: राजस्थान में नशे का फैलता नेटवर्क अब एक भयावह सामाजिक संकट का रूप ले चुका है। पुलिस रिकॉर्ड और बरामदगी के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में ड्रग तस्करी लगातार बढ़ रही है।

बता दें कि पिछले तीन वर्षों (2022-2024) में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी केवल अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी का विस्तार नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों तक मजबूत हो चुकी सप्लाई चेन और युवाओं में बढ़ती लत का सीधा संकेत देती है।

परिवारों पर भारी पड़ता नशा

नशे की गिरफ्त में आने के बाद युवा न केवल मानसिक और शारीरिक रूप से टूटते हैं, बल्कि परिवारों का सामाजिक ढांचा भी बिखर जाता है। चोरी, लूट और हिंसक घटनाएं ऐसे मामलों में आम हो जाती हैं।

कई परिवार अपने बच्चों को ड्रग्स की लत से निकालने के लिए इलाज पर लाखों रुपए खर्च कर चुके हैं, जमीन-जायदाद तक बेच दी, लेकिन ज्यादातर मामलों में नतीजा उम्मीद के अनुसार नहीं मिल पाया। यह स्थिति बताती है कि नशा सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक तबाही का भी कारण बन रहा है।

महंगा नशा शहरों में, सस्ता गांवों में फैल रहा

एक तरफ एमडी ड्रग्स और हेरोइन जैसे हाई-प्रोफाइल नशे का नेटवर्क है, जो शहरों में सक्रिय है और जिसकी थोड़ी-सी मात्रा भी लाखों-करोड़ों की कीमत रखती है। दूसरी तरफ डोडा चूरा और गांजा जैसे सस्ते नशे हैं, जो बड़ी मात्रा में ग्रामीण इलाकों में खपते हैं। यह पैटर्न साफ करता है कि महंगे नशे की सप्लाई अंतरराष्ट्रीय और इंटरसिटी चैनल से जुड़ी हुई है, जबकि सस्ता नशा स्थानीय नेटवर्क और गांव-देहात के उपभोक्ताओं पर आधारित है।

सरकारी और पुलिस प्रयासों पर भी सवाल

लगातार बरामदगी और बड़े नेटवर्क पकड़ने के बाद भी नशा खत्म होने की बजाय और गहराई तक फैलता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि तस्करी के रैकेट को जड़ से समाप्त करने के लिए सिर्फ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जन-जागरुकता, पुनर्वास सुविधाओं और कड़े नियंत्रण की भी जरूरत है।

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