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Rajasthan Assembly Election 2023 : जनता में पकड़ तो अनपढ़ जीत जाते… आईएएस-आईपीएस को मात

Rajasthan Elections 2023 : झुंझुनूं। मतदाताओं से सीधा जुड़ाव हो तो चुनावी समर में अनपढ़ों से पढ़े-लिखे भी मात खा जाते हैं। राजस्थान की राजनीति में ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव और मतदाताओं से निरतंर सम्पर्क के चलते प्रशासनिक सेवा से रिटायर्ड अधिकारियों को हार का स्वाद चखाया है। जीवन के 90 बसंत देख चुके काका के नाम से चर्चित झुंझुनूं जिले के सुंदरलाल कभी स्कूल नहीं गए।

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Rajasthan Election 2023

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Rajasthan Elections 2023 : झुंझुनूं। मतदाताओं से सीधा जुड़ाव हो तो चुनावी समर में अनपढ़ों से पढ़े-लिखे भी मात खा जाते हैं। राजस्थान की राजनीति में ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव और मतदाताओं से निरतंर सम्पर्क के चलते प्रशासनिक सेवा से रिटायर्ड अधिकारियों को हार का स्वाद चखाया है। जीवन के 90 बसंत देख चुके काका के नाम से चर्चित झुंझुनूं जिले के सुंदरलाल कभी स्कूल नहीं गए।

हालांकि उन्होंने विधानसभा चुनावों में सात बार पढ़े-लिखे उम्मीदवारों को हराया है। वर्ष 2003 में सूरजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से और 2008 में पिलानी विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा से रिटायर्ड अधिकारी हनुमान प्रसाद को हराया। इसके बाद पिलानी से ही वर्ष 2013 में सेवानिवृत्त आईएएस जेपी चंदेलिया को पराजित किया। हालांकि वर्ष 1998 में हनुमान प्रसाद भी सुंदरलाल को हरा चुके हैं। अक्षरों की समझ रखते थे सुंदरलाल हालांकि सुंदरलाल काका कभी स्कूल नहीं गए, लेकिन उन्हें अक्षरों की समझ है।

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इसलिए धीरे-धीरे पढ़ भी लेते हैं। सुंदरलाल के लिए कहा जाता है कि वह हारे हुए हों या फिर जीते हुए, हमेशा मतदाताओं के बीच ही रहते। कहा जाता है कि वे सुबह घर से निकलते और गांवों में मतदाताओं से मिलने के बाद शाम तक घर लौटते। वर्ष 1952 में कृषकार लोकपार्टी के ईश्वर सिंह ने एलएलबी योग्यताधारी रामदेवसिंह महरिया को हराया।

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ईश्वर सिंह निरक्षर थे। वर्ष 2003 व 2013 में भाजपा के मात्र साक्षर उम्मीदवार प्रेम सिंह बाजौर ने बीए उत्तीर्ण रमेशचंद्र खंडेलवाल को शिकस्त दी। बगरू विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान कांग्रेस विधायक एंव कांग्रेस प्रत्याशी गंगा देवी केवल साक्षर हैं। उन्होंने पिछले चुनाव में डॉ. कैलाश वर्मा को हराया था। इस बार भी उनका मुकाबला वर्मा से ही है।