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भाजपा के 9 व कांग्रेस के 14 बागी बैठने को राजी, 86 प्रत्याशी चुनावी मैदान से हटे

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rajasthan election 2018

जयपुर। कांग्रेस और भाजपा दोनों के पास टिकट कटने से बगावत पर उतरे अपनों से 'डील' का गुरुवार को आखिरी दिन है। दोनों ही दलों ने बुधवार को पूरा दिन बगावती नेताओं से बातचीत करके उनकी मान मनौवल का प्रयास किया। किसी को कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय तो किसी को मुख्यमंत्री आवास बुलाकर समझाया गया। बताया जाता है कि भाजपा के 9 व कांग्रेस के 14 बागी बैठने को राजी हो गए हैं।


हालांकि चुनाव में उतर चुके नेताओं ने साफ कर दिया कि उन्हें संगठन में नहीं बल्कि सत्ता में भागीदारी चाहिए। यह वादा कोई बड़ा नेता करेगा, तभी नामांकन वापस लेने पर विचार किया जा सकता है। ऐसे में बागी प्रत्याशियों के जनाधार के आधार पर बड़े नेताओं ने फोन पर बातचीत करके आश्वासन दिए। ऐसे हर नाराज नेता को लालबत्ती का आश्वासन थमा दिया गया। नामांकन वापसी के पहले दिन 86 प्रत्याशी नाम वापस लेकर चुनावी मैदान से हट गए। अब गुरुवार को दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। इसके बाद उम्मीदवारों की सूची घोषित करके चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए जाएंगे।

कांग्रेस में इनको बैठाने-मनाने की कोशिश
कांग्रेस ने बागी ललित भाटी, नाथूराम सिनोदिया, ब्रह्मदेव कुमावत, रामचन्द्र सराधना, बाबूलाल नागर, गोपाललाल गहलोत, महादेव सिंह खण्डेला, रमेश खींची, पूसाराम गोदारा को मनाने की कोशिश की। इसमें पार्टी को आंशिक कामयाबी भी मिल गई है। राज्य में मोटे तौर पर सचिन पायलट और अशोक गहलोत रूठों को मना रहे हैं। हालांकि केन्द्रीय नेता भी पूरे दिन बागी नेताओं की मनुहार में जुटे रहे।

लेकिन अधिकांश बागी केन्द्रीय नेताओं की बजाय पायलट और गहलोत के मुंह से ही सत्ता में भागीदारी का आश्वासन लेने की जिद पर अड़े रहे। ऐसे में कुछ प्रभावशाली नेताओं ने इन दोनों नेताओं ने स्वयं बातचीत करके उन्हें मनाया। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के करीब 14 बागी गुरुवार को अंतिम दिन नामांकन वापलोकसभा में उतारने का दिया भरोसास ले लेंगे।

शाह ने मनाया तो आहुजा ने नाम लिया वापस
भाजपा ने ज्ञानदेव आहूजा, कुलदीप सिंह मावली, सुरेश टांक, देवीसिंह शेखावत, डी.डी. कुमावत, सुखराम, राजेश गोयल और पुष्पेन्द्र सिंह कुड़की सहित अन्य की मान मनौवल की। भाजपा को भी करीब 9 रूठों को मनाने में आंशिक कामयाबी मिल गई है। मुख्य रूप से वसुंधरा राजे, ओमप्रकाश माथुर और गजेन्द्र सिंह शेखावत ने पार्टी से बगावत पर उतरे नेताओं को मनाने का प्रयास किया।

आहूजा से तो अमित शाह ने बात करके उन्होंने नामांकन वापस लेकर पार्टी के काम में लगने को कहा। इसके बाद आहूजा ने नाम वापसी की घोषणा कर दी। इन सभी अपनों को भी पार्टी ने सरकार बरकरार रखने पर ध्यान रखने का आश्वासन दिया है। इस प्रयास में पार्टी ने बसपा के पूर्व विधायक सुरेश मीणा को भी मनाकर भाजपा में शामिल कर दिया।

लोकसभा में उतारने का दिया भरोसा
कांग्रेस और भाजपा ने कुछ प्रभावशाली नेताओं को केन्द्रीय नेताओं ने टिकट कटने की वजह समझाई और यह वादा किया कि छह माह बाद लोकसभा चुनाव में उतार देंगे। उन्हें भरोसा दिया कि लोकसभा इलेक्शन की केन्द्रीय चुनाव समिति में भी वह उनके टिकट की पैरवी करेंगे।

सत्ता में भागीदारी का आश्वासन
बागी नेताओं को सरकार आने पर बोर्ड और आयोग अध्यक्ष बनाने के सब्जबाग दिखाए जा रहे हैं। एक बागी को संगठन में बड़ा दायित्व का आश्वान दिया तो उन्होंने बैठने से साफ मना कर दिया। कहा सरकार आने परलोकसभा में उतारने का दिया भरोसा संगठन को कोई नहीं पूछता। हालांकि बड़े नेता के दखल से बनी बात।

कुछ बोले, फोन आया लेकिन बैठेंगे नहीं
घाटोल विधायक नवनीतलाल निनामा ने कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का फोन आया था लेकिन मैंने कहा कि नामांकन वापस नहीं लूंगा। क्षेत्र में पार्टी की चिंता है इसलिए चुनाव लड़ रहा हूं। मंत्री धनसिंह रावत से भी बड़े नेताओं ने बातचीत की लेकिन वह पत्ते खोलने को तैयार नहीं हुए।

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