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Rajasthan Chunav 2023: राजस्थान में बंपर वोटिंग से बड़ा संकेत, कौन जीतेगा, कौन हारेगा?

Rajasthan Election 2023: राजस्थान में बंपर वोटिंग के बड़े संकेत मिल रहे हैं। राजस्थान विधानसभा के लिए इस बार 75.45 प्रतिशत मतदान हुआ। बढ़े मतदान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। जानिए क्या कहता है ट्रेंड—

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Rajasthan Election Result: राजस्थान की 199 विधानसभा सीटों पर शनिवार को हुए चुनाव में 75.45 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी 199 सीटों पर चुनाव हुआ था। उस समय राज्य में 74.06 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। 2013 में 75.04 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। 2008 में 66.25 प्रतिशत, 2003 में 67.18 और 1998 में 63.39 प्रतिशत वोट पड़े थे।


दांव पर दिग्गज नेताओं की किस्मत
अब कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ईवीएम मशीनों को संग्रहण केन्द्रों में रखा गया है। मतगणना तीन दिसंबर को मतगणना होगी, उसी दिन चुनाव परिणाम घोषित होगा। विधानसभा चुनाव के लिए मतदान संपन्न होने के बाद अब सबकी निगाहें चुनाव परिणामों पर है। 3 दिसंबर को साफ हो जाएगा कि राजस्थान में ऊंट किस करवट बैठता है। कांग्रेस का लक्ष्य सत्तारूढ़ पार्टी को हर पांच साल में सत्ता से बाहर करने के रिवाज को खत्म करना है, जबकि भाजपा अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में वापसी करना चाहती है। 2023 के विधानसभा चुनाव में श्रीगंगानगर जिले के करणपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी एवं विधायक गुरमीत सिंह कुन्नर के निधन के कारण करणपुर सीट पर चुनाव स्थगित कर दिया गया था।


राजस्थान विधानसभा चुनाव में दिग्गज नेताओं में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी, पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़, उपनेता प्रतिपक्ष डॉ. सतीश पूनियां, स्वायत शासन मंत्री शांति धारीवाल, शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला सहित गहलोत सरकार के कई मंत्री, भाजपा सांसद दीया कुमारी, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, बाबा बालकनाथ, किरोड़ी लाल मीणा एवं देवजी पटेल एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया, रालोपा के संयोजक एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल का चुनावी भाग्य ईवीएम में बंद हो गया। इसी तरह भाजपा एवं कांग्रेस के कई विधायकों सहित इस चुनाव में हिस्सा लेने सभी उम्मीदवारों का चुनावी भाग्य ईवीएम में बंद हो गया जो तीन दिसंबर मतगणना के दिन खुलेगा।

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मतदान बढ़ा और घटा और कब किसकी सत्ता आई
मतदान प्रतिशत बढ़ने पर राजनीतिक पंडितों का कहना है कि वोटिंग बढ़ना कांग्रेस के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियां अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही हैं। राजस्थान में पिछले 30 वर्षों से हर चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन होता आया है। इन छह चुनावों में 4 बार मतदान प्रतिशत बढ़ा और 2 बार कम हुआ। मगर... सत्ता परिवर्तन जरूर हुआ। अब 2023 में मतदान 75.25 हुआ है, जो गत चुनाव 2018 के मुकाबले अधिक है। फिर सत्ता परिवर्तन होगा या कांग्रेस सरकार रिपीट होगी। यह 3 दिसंबर को चुनाव परिणाम के बाद ही साफ होगा।

1993 में विवादित ढांचा ढहाए जाने के बाद भाजपा की भैंरोसिंह शेखावत सरकार को हटाकर राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। चुनाव हुआ तो बहुमत नहीं मिला। भाजपा ने जनता दल के साथ सरकार बनाई। 1998 में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस ने चुनाव लड़ा। चुनाव में कांग्रेस को भारी बहुमत मिला। भाजपा 33 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 153 सीटें मिली और सरकार बनाई। 2003 में गहलोत सरकार के समय हुए चुनाव में भाजपा ने 120 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। कांग्रेस 56 सीटों पर सिमट गई। 2008 में वसुंधरा राजे सरकार के समय हुए चुनाव में मतदान प्रतिशत गिरा। इसके बावजूद प्रदेश में सत्ता बदली। बसपा के 6 विधायकों को साथ लेकर कांग्रेस ने सरकार बनाई। 2013 में गहलोत सरकार के समय हुए चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला। भाजपा को 163 सीटें मिली, वहीं, कांग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई। भाजपा की सरकार बनी। 2018 में वसुंधरा सरकार में चुनाव हुआ, वोट प्रतिशत गत चुनाव से 0.50 फीसदी कम रहा। 100 सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने सरकार बनाई।

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