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Rajasthan News : बिजली व्यवस्था के निजीकरण पर अपडेट, अब जॉइंट वेंचर में चहेती कंपनियों की होगी एंट्री

Rajasthan News : बिजली व्यवस्था के निजीकरण के बढ़ते विवाद के बीच बिजली कंपनियां हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (हेम) के तहत जॉइंट वेंचर में 3 से 5 कंपनियों के शामिल होने का रास्ता खोल रही हैं।

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Rajasthan Electricity System Privatization Update Now Preparations for Entry of Favorite Companies in Joint Venture

Rajasthan News : बिजली व्यवस्था के निजीकरण के बढ़ते विवाद के बीच बिजली कंपनियां हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (हेम) के तहत जॉइंट वेंचर में 3 से 5 कंपनियों के शामिल होने का रास्ता खोल रही हैं। इनमें वे कंपनियां भी शामिल हो सकेंगी, जिनके पास भले ही इस फील्ड का अनुभव नहीं हो, लेकिन पैसा लगा सकें। नए सिरे से लगाए जाने वाले टेंडर में इसी तरह के प्रावधान प्रस्तावित किए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) में भी इसी तर्ज पर काम हुआ है और इस काम में ऐसी ही कुछ कंपनियों को ज्वाइंट वेंचर में शामिल कराने की राह तलाशी जा रही है। ऊर्जा महकमे के एक बड़े अधिकारी एनएचएआई में इस मॉडल काम कर चुके हैं। प्रदेश में बिजली कंपनियां करीब 30 हजार करोड़ के काम इसी मॉडल पर सौंप रही है।

विरोध के बाद बिलिंग और मीटरिंग कार्य अलग किया

निजीकरण के विरोध में राजस्थान भर में कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच प्रबंधन ने इस मॉडल से बिलिंग और मीटरिंग से जुड़े काम को अलग कर दिया है। इसी कारण अब नए सिरे से टेंडर किए जा रहे हैं।

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इस दिक्कत को दूर करने की जरूरत

बिजली कंपनियों में कई काम ठेके पर और कुछ निजी हाथों में सौंपे गए हैं। कई मामलों में कंपनी बीच में ही काम छोड़ गई तो कुछ शहरों में भी बिजली सप्लाई से लेकर बिलिंग तक पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे हालात के बीच इस मॉडल को सफलता से संचालित करने की चुनौती रहेगी।

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मुख्य रूप से यह रहेगा काम

1- बिजली तंत्र का ऑपरेशन-मेंटीनेंस और बिजली सप्लाई व्यवस्था।
2- 33 केवी ग्रिड सब स्टेशन का संचालन।
3- 11 केवी की लाइन और इससे जुड़े अन्य तंत्र का संचालन।
4- घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के फीडर को अलग करना।
5- संबंधित जीएसएस पर सोलर पैनल लगाना।

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बड़ी कंपनियों पर फोकस…?

निविदा में जो शर्तें रखी गई है कि उसमें देश की बड़ी कंपनियों के आने की संभावना ज्यादा हो गई है। क्योंकि एक जगह का काम ही 500 से 900 करोड़ रुपए लागत का है। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता भी इस पर सवाल उठा चुके हैं।

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