
जयपुर।
Rajasthan Vidhansabha Election 2018 की तैयारियों के साथ-साथ पार्टियों के कई नेता कार्यकर्ताओं ने टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर करते हुए बागी ही ताल ठोक दी है। गहलोत ने नामांकन भरने के दूसरे दिन मंगलवार को पत्रकारों से कई मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि बगावत यदि हुई तो उनको हम मना लेंगे। तीन दिन का समय है।
गहलोत ने कहा कि हम अपील करते हैं पार्टी हित व देश हित में नामांकन वापस लें, चुनाव के बाद उचित लोगों को संगठन-सत्ता में जगह दी जाएगी। उन्होंने बताया कि टिकट वितरण में राहुल गांधी के युवाओं व महिलाओं को मौका देने के फॉर्मूले पर काम किया गया है। इसमें वे कोई समझौता नहीं करना चाहते थे।
सीएम राजे पर साधा निशाना
गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पूरे राजस्थान में मेरी सरकार के कई काम रोक दिए। मारवाड़ की उपेक्षा हुई, खास तौर पर जोधपुर का। क्योंकि यहां से मैं आता हूं। माफी चाहता हूं मेरे कारण से भाजपा सरकार व वसुंधरा राजे ने यहां की उपेक्षा की। अब मौका है सबक सिखाने का।
किस मुद्दे पर क्या बोले गहलोत
आगामी रणनीति पर उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में नई पीढ़ी के साथ अनुभवी राजनेता काम करेंगे। कांग्रेस में राजनीति का भविष्य कुछ ऐसा ही होगा। साथ ही आगामी चुनावों में दावेदारी की प्रक्रिया ही बदल जाएगी। इसमें ब्लॉक अध्यक्ष से फीडबैक और जिलाध्यक्ष की अनुशंसा पर ही सबकुछ निर्भर करेगा।
डूडी प्रकरण पर बीकानेर में टिकट बदलने के बाद नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी के बयान पर बोलते हुए गहलोत ने कहा कि जब टिकट बदले गए तो वे एक बैठक में थे और अचानक उनको यह सूचना मिली ऐसे में उनका रिएक्शन यह था कि अब हम चुनाव कैसे जीत पाएंगे? उनका मतलब यह नहीं था कि वह बगावत कर रहे हैं और खुद कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। उसको गलत तरीके से पेश किया गया है।
हिंदूत्व-राम मंदिर पर चुनाव के समय ही यह यह मुद्दा उठाया जाता है। जनता इसको समझ गई है। पहले आरएसएस के मोहन भागवत ने कहा कि यह हमारा मुद्दा नहीं फिर अचानक उन्होंने की कानून बनाने की मांग की। यूपी में 400 सीटों में से एक भी टिकट नहीं देना उचित है क्या? सचिन पायलट खड़े हो गए और एक मात्र मुस्लिम टिकट दे दिया। यह डिस्ट्रक्टिव सोच है।
Published on:
20 Nov 2018 05:28 pm
