
राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक नाबालिग बालिका की याचिका पर सुनवाई करते हुए सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम) को एक विवादित और भ्रामक पोस्ट को तुरंत ब्लॉक करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने माना कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही गलत जानकारी के कारण एक मासूम बच्ची और उसकी मां की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड की अदालत में पेश हुई याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता एक 7 साल की बच्ची है जो अपनी मां के साथ रह रही है।
बच्ची की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता राजेश कुमार ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के माता-पिता की शादी 2010 में हुई थी। 2015 में पिता की मृत्यु के बाद से वह अपनी मां के साथ सुरक्षित रह रही है।
दूसरी ओर, दादा ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि दादी का निधन हो चुका है और वे खुद 70 साल के हैं। उन्होंने ऐसी कोई पोस्ट शेयर नहीं की है।
अदालत ने दलीलों को सुनने के बाद पाया कि पोस्ट चाहे किसी ने भी डाली हो, उसका प्रभाव विनाशकारी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की निजता और सुरक्षा के साथ डिजिटल खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मेटा कंपनी को पक्षकार बनाते हुए निर्देश दिया कि वे उस विशिष्ट पोस्ट और उससे जुड़ी तमाम भ्रामक कड़ियों को तुरंत ब्लॉक या डिलीट करें।
हाईकोर्ट के इस आदेश ने एक बार फिर सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय की है। यह मामला मिसाल बनेगा कि अगर कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाओं को नहीं रोकती हैं, तो अदालतें सख्त कदम उठाएंगी।
राजस्थान में यह अपनी तरह का एक अनोखा मामला है जहाँ एक 'मिसिंग' पोस्ट को लेकर हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।
राजस्थान हाईकोर्ट का यह फैसला केवल एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है।
Updated on:
08 Mar 2026 12:08 pm
Published on:
08 Mar 2026 12:07 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
