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Rajasthan: 36 साल नौकरी, वेतन सिर्फ 240 रुपए महीना! हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Salary Dispute Case: राजस्थान उच्च न्यायालय ने वर्ष 1990 से धौलपुर के राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (परिचारक) के पद पर कार्यरत एक कर्मचारी को 240 रुपए मासिक वेतन का भुगतान किए जाने पर राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
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सांकेतिक इमेज- पत्रिका

Salary Dispute Case: राजस्थान उच्च न्यायालय ने वर्ष 1990 से धौलपुर के राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (परिचारक) के पद पर कार्यरत एक कर्मचारी को 240 रुपए मासिक वेतन का भुगतान किए जाने पर राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए आदेश दिया है कि यदि याचिकाकर्ता वर्तमान में सेवा में है, तो आगामी आदेश तक उसकी सेवाएं समाप्त न की जाएं। न्यायाधीश आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश विजय सिंह गोस्वामी की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जारी किए।

यह है पूरा प्रकरण

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति वर्ष 1990 में धौलपुर के राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर हुई थी। तब से लेकर आज तक (लगभग 36 वर्षों से) उसे प्रति माह सिर्फ 240 रुपए वेतन के रूप में दिए जा रहे हैं। इतनी कम राशि में सामान्य व्यक्ति के लिए जीवन निर्वाह करना और पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का वहन करना बेहद मुश्किल है।

कम वेतन देना आर्थिक शोषण

अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वर्तमान दौर में किसी कर्मचारी को काम के बदले इतनी अल्प राशि देना उसका आर्थिक शोषण करने के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। याचिकाकर्ता ने अपनी सेवाओं के नियमितीकरण और उचित वेतनमान के लिए विभाग के समक्ष कई बार प्रतिवेदन पेश किए, लेकिन उच्चाधिकारियों ने 36 वर्ष में आज तक उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि उसे पद पर नियमित करने के साथ ही अब तक का समस्त बकाया वेतन और भत्ते दिलाए जाएं। इतनी कम राशि में जीवन निर्वाह करना परिवादी के लिए चुनौती साबित हो रहा है।

न्यूनतम मजदूरी से भी कम भुगतान

जानकारी के अनुसार राजस्थान सरकार के नियमों के अनुसार अप्रेल 2026 में कुशल, अर्द्ध-कुशल और अकुशल श्रेणी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी क्रमश: 309, 297 और 285 रुपए प्रतिदिन यानि प्रति माह 7,410 से 9,334 रुपए के बीच निर्धारित है। लेकिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के इस मामले में सरकार के नियमों की अनदेखी की गई है। मामले में अब हाईकोर्ट ने कर्मचारी को अंतरिम राहत देते हुए आदेश दिया है कि यदि याचिकाकर्ता वर्तमान में सेवा में है, तो आगामी आदेश तक उसकी सेवाएं समाप्त न की जाएं।