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राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद मंत्री झाबर सिंह खर्रा का बड़ा बयान, जानें क्या कुछ कहा

Rajasthan Panchayat Election: पंचायत और निकाय चुनाव पर राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बड़ा बयान दिया।

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Minister Jhabar Singh Kharra

फोटो- पत्रिका नेटवर्क

हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार को पंचायती राज संस्थाओं व शहरी निकायों के परिसीमन की प्रक्रिया 31 दिसम्बर तक पूरी कराने और चुनाव 15 अप्रेल 2026 तक कराने के निर्देश दिए है। पंचायत और निकाय चुनाव पर राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बड़ा बयान दिया।

उन्होंने कहा कि भजनलाल सरकार चुनाव के लिए पहले भी तैयार थी और अब भी। हम निकायों के वार्डों के पुनर्गठन व परिसीमन की अधिसूचना जारी कर चुके। अब ओबीसी आयोग व चुनाव आयोग को काम पूरा करना है। हाईकोर्ट के जो आदेश हैं, उसकी पालना चुनाव आयोग को करानी है। आदेश की प्रति आने पर अध्ययन कर उचित निर्णय करेंगे।

हाईकोर्ट ने पंचायत व शहरी निकायों के चुनाव 15 अप्रेल 2026 तक कराने को कहा है। इससे चुनाव कराने के लिए पांच माह का समय मिल गया। राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि परिसीमन को लेकर आ रहे मामलों पर राज्य स्तरीय कमेटी विचार करे। साथ ही कोर्ट ने परिसीमन व प्रशासक लगाने के मामलों में दखल से इंकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिसीमन की अधिसूचना को पुन: कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा व न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा, गिरिराज सिंह देवंदा व अन्य की जयपुर व जोधपुर में लंबित 439 याचिकाओं को निस्तारित करते हुए शुक्रवार को यह फैसला सुनाया।

राज्य स्तरीय समिति कराए परिसीमन

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद पंचायतों व निकायों के चुनाव नहीं टाले जा सकते। कार्यकाल पूरा होने के बाद सरपंचों के सामान्य व्यक्ति होने के कारण उन्हें पंचायत कार्य नहीं सौंपा जा सकता। दूसरी ओर संयम लोढ़ा की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार केवल प्राकृतिक आपदा के आधार पर ही चुनाव टाले जा सकते हैं। याचिकाओं में यह भी कहा कि परिसीमन को लेकर सरकार की गाइडलाइन की अवहेलना की जा रही है। कुछ याचिकाएं ऐसी थीं, जिनमें वार्ड समाप्त होने के बाद प्रधान को हटाने को चुनौती दी गई थी।

सरकार कब तक चुनाव लटकाए रखना चाहती है?

कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला लिखवाते समय महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद से पूछा कि पंचायत-निकाय चुनाव किस तारीख तक करा लिए जाएंगे, इस पर महाधिवक्ता जवाब नहीं दे पाए तो कोर्ट ने टिप्पणी की कि सरकार कब तक चुनाव लटकाए रखना चाहती है। महाधिवक्ता ने जवाब में कहा कि जल्द चुनाव करा लिए जाएंगे। इस पर कोर्ट ने 31 मार्च तक चुनाव कराने के निर्देश दिए, जिस पर महाधिवक्ता व अन्य अधिवक्ताओं ने कहा कि मार्च में बोर्ड परीक्षाएं होने के कारण चुनाव कराया जाना संभव नहीं हो पाएगा। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि हम 15 दिन अधिक दे सकते हैं, सरकार 15 अप्रेल तक हर हाल में पंचायत-निकाय चुनाव करवा ले। साथ ही कहा कि तीन सदस्यीय राज्य स्तरीय कमेटी के जरिए परिसीमन का कार्य कराए। कमेटी कलक्टर की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर कार्रवाई करे।

राज्य सरकार ने क्या कहा?

वन स्टेट-वन इलेक्शन को लेकर परीक्षण किया जा रहा है। इसके लिए कमेटी का गठन भी किया गया है। इसके अलावा कई जिलों को समाप्त करने के बाद उनकी सीमाओं के निर्धारण के साथ पंचायतों का पुनर्गठन व नगर निकायों के परिसीमन का काम चल रहा है। यह भी कहा कि पंचायती राज कानून के तहत सरकार प्रशासन लगा सकती है।

इनका कहना है

सरकार चुनाव के लिए पहले भी तैयार थी और अब भी। हम निकायों के वार्डों के पुनर्गठन व परिसीमन की अधिसूचना जारी कर चुके। अब ओबीसी आयोग व चुनाव आयोग को काम पूरा करना है। हाईकोर्ट के जो आदेश हैं, उसकी पालना चुनाव आयोग को करानी है। आदेश की प्रति आने पर अध्ययन कर उचित निर्णय करेंगे।
-झाबर सिंह खर्रा, स्वायत्त शासन मंत्री