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Jaipur News: राजधानी के एक पारिवारिक विवाद में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने पायलट पति को अपनी पत्नी और बेटी को प्रतिमाह 1.40 लाख रुपये का भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। पारिवारिक न्यायालय-1 ने यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने पायलट पत्नी को 80 हजार रुपये प्रतिमाह और बेटी को 60 हजार रुपये प्रतिमाह देने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याची-प्रार्थी पत्नी के पास आय का कोई पर्याप्त स्रोत नहीं है। जबकि उसके पति की तुलना में उसकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि प्रार्थी पत्नी अपने वैवाहिक घर में जिस जीवन स्तर पर रह रही थी, उसे उसी स्तर का जीवन यापन करने का अधिकार है।
प्रार्थी पत्नी की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट ने कोर्ट को बताया कि प्रार्थी का विवाह पायलट पति के साथ 2 मई 2015 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। इस दौरान उनकी एक बेटी का जन्म भी हुआ। एडवोकेट ने बताया कि शादी के बाद से ही प्रार्थी पत्नी अपने पति के साथ ही रह रही थी। उन्होंने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि प्रार्थी के पति को एयरलाइंस से प्रतिमाह 6.50 लाख रुपये वेतन मिलता है। इसके अलावा, प्रार्थी के पति की अन्य संस्थानों से भी आय होती है।
एडवोकेट ने कोर्ट से आग्रह किया कि ऐसे में प्रार्थी पत्नी और उसकी बेटी के लिए 3 लाख रुपये मासिक भरण-पोषण की राशि दिलवाई जाए। हालांकि, कोर्ट ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए पायलट पति को अपनी पत्नी और बेटी को कुल 1.40 लाख रुपये मासिक भरण-पोषण देने का आदेश दिया।
कोर्ट का यह फैसला उन महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जो विवाह के बाद आर्थिक रूप से अपने पति पर निर्भर हो जाती हैं। यह फैसला यह भी स्पष्ट करता है कि तलाक या अलगाव की स्थिति में महिलाओं को उसी जीवन स्तर को बनाए रखने का अधिकार है, जैसा वे अपने वैवाहिक जीवन में जी रही थीं, खासकर जब पति की आर्थिक स्थिति मजबूत हो। इस मामले में कोर्ट का त्वरित और न्यायसंगत फैसला पीड़ित पत्नी और बेटी के लिए राहत लेकर आया है।
Published on:
04 May 2025 10:14 am
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