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कहां हो मेरे लाल: जयपुर में मासूमों की गुमशुदगी और मौत से मातम, हर घर में पसरा सन्नाटा, परिजनों की आंखों में इंतजार

जयपुर में कई दर्दनाक घटनाओं ने परिवारों की खुशियां छीन लीं। कहीं दो बच्चे बंद कार में दम तोड़ गए, तो कहीं मासूम लापता होकर अब तक घर नहीं लौटे। परिजनों की आंखों में आंसू और दिल में बस उम्मीद है कि बच्चे सही-सलामत लौट आएं।

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जयपुर

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Arvind Rao

Aug 21, 2025

Missing Children

मासूमों के परिजन (फोटो- पत्रिका)

जयपुर: कभी आंगन में गूंजती हंसी, दीवारों पर उकेरी गई बचपन की शरारतें, खिलखिलाती आवाजें अब बस खामोशी और दर्द ही बचा है। शहर के अलग-अलग इलाकों में हुई तीन घटनाओं ने कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। कहीं दो मासूम बच्चे एक बंद कार में दम तोड़ गए, तो कहीं नन्हें कदम अचानक घर की दहलीज पार कर गुमनामी में खो गए।


अब हर बीतते पल के साथ सिर्फ इंतजार, आंसू और अधूरी उम्मीदें हैं। दीवारों पर टंगी उन तस्वीरों से मां और पिता का एक ही सवाल निकलता है, 'कहाँ हो मेरे लाल?' इस पीड़ा में लिपटी यादें, अब बस एक ही दुआ करती हैं, काश ये सब एक बुरा सपना होता।

आंखों में आंसू और दिल में उम्मीद

कभी आंगन में खेलते हंसी-ठिठोली करने वाले बच्चे अब घर में दुख और सन्नाटे की वजह है। परिजन की आंखों में आंसू हैं और दिल में बस यही दुआ है, हमारे लाल सही सलामत लौट आएं। पिछले छह दिन से परिवारजन बच्चों की तलाश में जुटे हैं। करणी विहार थाना क्षेत्र में 15 अगस्त को गुम हुए दो चचेरे भाई संजय (15) और समीर (15) की तलाश में घर का हर कोई बेचैन है। पड़ोस की बुजुर्ग महिला ने संजय और समीर को घर के पास देखा, लेकिन बच्चों ने पुकार सुनी नहीं और आगे बढ़ गए।


उन्होंने वहीं कपड़ों से भरा बैग भी छोड़ दिया। दादी कमोद कंवर और दादा कल्याण सिंह परेशान हैं। बच्चों की बुआ बेबी कंवर नागौर से पति के साथ दुख की इस घड़ी में मायके आई हुई हैं। संजय की बहन पायल ने बताया कि घर से निकलने से पहले संजय और समीर कुछ उदास से दिख रहे थे। परिजन का कहना है कि बच्चों के मन का कोई गहरा दर्द है, जिसे समझना जरूरी है।

काश! किसी ने वक्त पर गाड़ी देख ली होती

नागतलाई में हुई दिल दहला देने वाली घटना के बाद हर घर गमगीन था। मासूम अनस और अहसान की मौत ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। खेलते-खेलते एसयूवी में बंद होकर तड़पते हुए दम तोड़ देने वाले इन नन्हें फरिश्तों की यादें परिजन और पड़ोसियों की आंखों से अश्रुधारा बनकर बह रही थीं।


बुधवार को सवाई मानसिंह अस्पताल में मेडिकल बोर्ड ने दोनों का पोस्टमॉर्टम किया, लेकिन मौत का कारण अंतिम रूप से अभी एफएसएल रिपोर्ट आने तक सुरक्षित रखा गया है। हालांकि, शुरुआती जांच और गाड़ी के अंदर मिले हालात इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि तेज गर्मी और दम घुटने ने दोनों मासूमों की सांसें छीन ली।

गाड़ी के अंदर की सीटों और अन्य हिस्सों पर मिले संघर्ष के निशान बच्चों के आखिरी पलों की पीड़ा को गवाही दे रहे थे। एक भाई का सिर चालक सीट से गेट की तरफ लटका मिला, वहीं दूसरा भाई आगे की दोनों सीट के बीच में फंसा मिला।

माता-पिता के पैर छूकर स्कूल गए बच्चे, लौटे नहीं

बच्चों के लापता होने के बाद घर का आंगन सूना हो गया। भूख नहीं लगती, प्यास नहीं परिजन की आंखें बच्चों की तलाश में नम रहती हैं। हनुमान सिटी सांगानेर में रहने वाली हेमा देवी के दो बेटे, 13 वर्षीय नितिन सिंह और 16 वर्षीय मोहित सिंह 14 अगस्त से लापता हैं। बच्चों के साथ उनकी बुआ का लड़का 15 वर्षीय अरमान भी गुम है। हेमा ने बताया कि सुबह बच्चों के लिए टिफिन तैयार किया और पैर छूकर स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर बच्चे घर से निकले।


किसी को अंदाजा नहीं था कि यह मुस्कान एक दर्दनाक इंतजार में बदल जाएगी। नितिन कक्षा 9 में, मोहित कक्षा 10 में पढ़ता है। दोनों स्कूल पैदल जाते थे। सुबह करीब 8 बजे बड़ी बहन ने अपना फोन देखा तो लगा कि बच्चे गलती से फोन लेकर चले गए, तब उसने स्कूल फोन किया तो पता चला कि वे स्कूल ही नहीं आए।

घर में अब हर तरफ सन्नाटा पसरा है। जहां कभी दोनों भाइयों की खिलखिलाहट गूंजती थी, वहीं अब मातम की चुप्पी है। पिता शहजाद, मां शब्बा और परिवार के अन्य सदस्य बेसुध हैं। मोहल्ले के लोग बताते हैं, कल तक यही बच्चे गली में खेल रहे थे, कौन जानता था कि आज इन्हें कफन ओड़ते देखेंगे। पुलिस जांच अभी जारी है। एसयूवी पड़ोसी सूरज बंजारा की बताई जा रही है, जो पांच दिन से घर से 35 फीट दूर बाहर खड़ी थी। गाड़ी के गेट भी खुले हुए थे।

यहां तक कि सर्च के दौरान जब पुलिस पहुंची, तभी गेट खुले हुए थे। गेट खोलने पर दोनों बच्चे अंदर मिले आशंका है कि दोनों बच्चे खेलते-खेलते अंदर घुस गए और फिर उनसे गेट नहीं खुला सवाल उठ रहे हैं कि गाड़ी का लॉक खुला कैसे था। विसरा और अन्य सबूत एफएसएल भेज दिए गए हैं। दोनों बच्चों के परिजन को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत पांच-पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

टॉपिक एक्सपर्ट- बच्चों में आ रहे बदलाव को समझें


बच्चों में आ रहे बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं। अगर बच्चे के व्यवहार में कुछ बदलाव नजर आता है, वह अकेला बैठा रहता है, उदास रहता है तो उसी समय माता-पिता को एक्शन लेना चाहिए। इससे बच्चे को लेकर आने वाली समस्या से बचा जा सकता है। बच्चे से खुलकर बात करें, उसे दोस्त बनाएं, इससे आप उसकी समस्या को समझ सकते हैं।
-डॉ. आरती मिड्ढा, मनोचिकित्सक