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Rajasthan: चार साल में 20 हजार नए डॉक्टर तैयार, दो हजार को भी नौकरी नहीं दे पाई सरकार; कब निकलेगी भर्तियां?

वर्ष 2021 के बाद प्रदेश में करीब 20 हजार नए डॉक्टर तैयार हुए मगर इनमें से करीब 2 हजार को भी सरकारी नौकरी नहीं मिली।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में अब प्रति वर्ष 5 हजार से अधिक नए डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। ये राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में रजिस्ट्रेशन तो कराते हैं लेकिन इनमें 40 से 50 प्रतिशत सरकारी नौकरी ज्वॉइन नहीं कर पाते और निजी में सेवाएं देने चले जाते हैं। वर्ष 2021 के बाद प्रदेश में करीब 20 हजार नए डॉक्टर तैयार हुए मगर इनमें से करीब 2 हजार को भी सरकारी नौकरी नहीं मिली।

वर्ष 2022 में 1765 डॉक्टरों की भर्ती के बाद अभी तक दूसरी भर्ती पूरी नहीं हुई है। शेष डॉक्टर निजी अस्पतालों, क्लिनिक या अन्य राज्यों में चले गए। वर्ष 2024 में निकाली गई चिकित्सकों की भर्ती अब भी प्रक्रियाधीन है। इस भर्ती के पदों को दो बार संशोधित कर अब 1700 किया गया है। प्रदेश में चिकित्सकों के करीब 15 हजार पद स्वीकृत हैं, जिनमें से करीब 10 हजार ही भरे हुए हैं। स्वीकृत पद भी जरूरत की तुलना में करीब 50 फीसदी ही हैं। ऐसे में राज्य के सरकारी अस्पतालों में 20 हजार नए डॉक्टरों की जरूरत मानी जा रही है।

एक भी अस्पताल आदर्श मॉडल नहीं

राज्य सरकार ने भले ही हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने का दावा किया हो, मगर स्थिति यह है कि एक भी जिले में ऐसा कोई अस्पताल नहीं जहां मरीजों की संख्या के अनुपात में चिकित्सकों की 100 प्रतिशत पूर्ति हो। जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) से लेकर जोधपुर, कोटा, बीकानेर व उदयपुर के बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है।

…और मेडिकल कॉलेज खुल रहे भरपूर

एक दशक पहले वर्ष 2013-14 में राजस्थान में 10 मेडिकल कॉलेज थे, जिनमें एमबीबीएस सीटों की संख्या 1750 थी। वर्ष 2024-25 में कॉलेजों की संख्या बढ़कर 43 और सीटें 5 हजार से अधिक हो चुकी हैं।

नीतियों में खामियां, प्रबंधन में कमजोरी

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में डॉक्टरों की कमी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य प्रबंधन में खामियां हैं। समय पर भर्तियां नहीं होतीं। नियुक्ति से जुड़े विवाद लंबे समय तक अदालतों में चलते रहते हैं। कई युवा डॉक्टर बेहतर सुविधाओं की कमी और असुरक्षा के माहौल के कारण सरकारी सेवा में नहीं आना चाहते। बार-बार तबादलों के कारण भी युवा डॉक्टर सरकारी सेवा से अरुचि दिखा रहे हैं। कई ज्वॉइन करने के बाद पीजी करने चले जाते हैं।

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बस रेफर हो रहे मरीज

ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में डॉक्टरों की अनुपलब्धता से मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। कई जिलों, कस्बों से हर छोटी-बड़ी दुर्घटना पर लोगों को शहरों के अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।

आंकलन कर निकाली जाएंगी भर्ती- चिकित्सा मंत्री

भर्तियां हमारी सरकार की पहली प्राथमिकता में है। हमने तो पिछली सरकार के समय की अधूरी भर्तियां भी पूरी की हैं। चिकित्सकों के भी 1700 पदों की भर्ती प्रक्रिया प्रक्रियाधीन है। आंकलन कर और भर्तियां निकाली जाएंगी।- गजेन्द्र सिंह खींवसर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री

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