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Rajasthan Panchayat Election: कोटपूतली-बहरोड़ को नया जिला बनाए जाने के साथ ही यहां नई जिला परिषद का गठन भी हो गया है। परिसीमन के बाद जिले में कुल 27 जिला परिषद वार्ड बनाए गए है। इन 27 जिला परिषद सदस्यों द्वारा ही नए जिले के पहले जिला प्रमुख का चुनाव किया जाएगा।
नए परिसीमन के अनुसार एक जिला परिषद सदस्य औसतन करीब 35 हजार लोगों का प्रतिनिधित्व करेगा, जबकि पंचायत समिति सदस्य लगभग 7 हजार आबादी का प्रतिनिधि करेगा।
इससे विकास कार्यों की जिम्मेदारी और जनसंपर्क का दायरा भी स्पष्ट होगा। राजनीतिज्ञ लोगों का मानना है कि नए नियमों और परिसीमन के बाद आगामी चुनावों में पहले जैसे समीकरण नहीं रहेंगे और कई स्थानों पर पुराने और नए नेताओं के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
पंचायत व नगर निकाय चुनावों में दो से अधिक संतान वाले प्रत्याशियों पर लगी रोक हटाने के निर्णय को भी प्रदेश और जिले की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
पहले इस नियम से बचने के लिए कई मामलों में गलत शपथ पत्र देने के आरोप सामने आते रहे हैं, जिसके चलते कई जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए और कुछ मामलों में जांच भी चली। अब यह शर्त हटने से ऐसे विवाद और कानूनी झंझट कम होने की संभावना जताई जा रही है।
करीब तीन दशक बाद लिए गए इस फैसले से कई अनुभवी नेता फिर से चुनावी मैदान में उतर सकेंगे, जो अब तक नियमों के कारण सक्रिय राजनीति से दूर थे। इससे आगामी चुनावों में हार-जीत के समीकरण बदलने की संभावना है।
परिसीमन के बाद जिले की पंचायत समिति के वार्डों का भी पुनर्गठन किया गया है। इसके अनुसार पंस नीमराणा में 21, बहरोड़ में 15, पावटा में 19, विराटनगर में 15, मैड कुण्डला में 15, नारायणपुर में 17, बानसूर में 27 और कोटपूतली में 17 पंचायत समिति सदस्य वार्ड निर्धारित किए गए है। जिले में पहले 177 ग्राम पंचायत थी। परिसीमन के बाद 66 नई ग्राम पंचायत और बन गई। इधर, परिसीमन के बाद नगर परिषद के वार्ड भी 40 से बढ़कर 60 हो गए है।
Updated on:
09 Mar 2026 04:44 pm
Published on:
09 Mar 2026 03:52 pm
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