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Tree Protection Bill: बड़ा निर्णय, गैर कृषि भूमि पर भी पेड़ों की कटाई पर लगेगी सख्त रोक, कानून लाने की तैयारी

Environment Protection: खेजड़ी समेत महत्वपूर्ण वृक्षों के संरक्षण के लिए सख्त कानून लाएगी राजस्थान सरकार। वृक्ष संरक्षण विधेयक का मसौदा तैयार करने को बनी उच्च स्तरीय समिति, पहली बैठक आयोजित।

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जयपुर

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Rajesh Dixit

Mar 09, 2026

Rajasthan Panchayat Elections more than two children will be able to contest elections Today Two bills will be introduced

सीएम भजनलाल शर्मा। फोटो पत्रिका

Khejri Tree: जयपुर. राज्य सरकार प्रदेश की संस्कृति, पर्यावरण और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए खेजड़ी सहित अन्य महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण के लिए सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है। इस दिशा में ‘वृक्ष संरक्षण विधेयक’ का प्रारूप तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति की पहली बैठक सोमवार सुबह संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में उनके निवास पर आयोजित की गई।

बैठक में राजस्व एवं उपनिवेशन मंत्री हेमंत मीणा, वन मंत्री संजय शर्मा, विधि विभाग के प्रमुख शासन सचिव, राजस्व विभाग के शासन सचिव तथा विधि विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान वृक्षों के संरक्षण और अवैध कटाई पर रोक लगाने के लिए मजबूत और प्रभावी कानून बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
समिति ने अन्य राज्यों में लागू वृक्ष संरक्षण कानूनों का तुलनात्मक अध्ययन कर उनके प्रावधानों पर विचार-विमर्श किया। साथ ही यह तय किया गया कि प्रस्तावित विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित विभागों, विधि विशेषज्ञों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के सुझाव भी लिए जाएंगे, ताकि कानून व्यावहारिक और प्रभावी बन सके। समिति की अगली बैठक 11 मार्च को आयोजित की जाएगी।

गौरतलब है कि वर्तमान में कृषि भूमि पर पेड़ों की कटाई की अनुमति और अवैध कटाई पर दंड का प्रावधान काश्तकारी कानून के अंतर्गत है। हालांकि अब राज्य सरकार नया कानून लाकर आवंटित, रूपांतरित, अधिग्रहित और आबादी सहित सभी प्रकार की गैर कृषि उपयोग वाली भूमियों पर भी वृक्ष संरक्षण के लिए सख्त प्रावधान लागू करने की योजना बना रही है।

नए कानून के तहत ऐसी भूमियों पर बिना अनुमति पेड़ों की कटाई पर रोक होगी और केवल अधिकृत अधिकारी की अनुमति के बाद ही न्यूनतम आवश्यक पेड़ों को हटाया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना और प्रदेश की पारंपरिक वृक्ष संपदा को सुरक्षित रखना है।