
Rajasthan Paper Leak - AI PIC
राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले अपराधियों के खिलाफ राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार कड़े कदम उठा रही हैं। इसी क्रम में राजस्थान पुलिस की विशेष जांच इकाई यानी स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने प्रदेश के 15 पेपर लीक माफियाओं की एक आधिकारिक सूची जारी की है। ये सभी आरोपी वर्ष 2024 के एक बड़े परीक्षा फर्जीवाड़े के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे हैं और अपनी पहचान छुपाकर पुलिस को लगातार चकमा दे रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन आरोपियों ने शिक्षक भर्ती, रीट (REET) और पटवारी भर्ती जैसी बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक करके लाखों-करोड़ों रुपए का काला कारोबार किया, उन शातिर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से प्रति आरोपी सिर्फ 10-10 हजार रुपए के नकद पुरस्कार की घोषणा की गई है।
इस इनामी राशि को लेकर अब स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठने लगा है कि लाखों रुपए का वारा-न्यारा करने वाले इन खतरनाक माफियाओं को पकड़वाने के लिए कोई भी व्यक्ति इतनी कम राशि के लिए अपनी जान जोखिम में क्यों डालेगा?
एसओजी (SOG) की जांच में यह साफ हो चुका है कि इस वांटेड लिस्ट में शामिल सभी 15 आरोपियों ने राजस्थान की सबसे बड़ी परीक्षाओं में शामिल रीट भर्ती, शिक्षक भर्ती और पटवारी भर्ती परीक्षाओं के दौरान अवैध रूप से प्रश्न पत्र हासिल किए थे और उन्हें आगे मोटी रकम में बेचा था। इन माफियाओं के संगठित नेटवर्क के कारण राज्य के लाखों मेहनती अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया था और सरकार को कई परीक्षाएं रद्द या स्थगित करनी पड़ी थीं।
पुलिस मुख्यालय से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन सभी फरार आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं जैसे धारा 419 (पहचान छुपाकर धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज बनाना और इस्तेमाल करना) और 120बी (आपराधिक साजिश रचना) के तहत मुकदमे दर्ज हैं। इसके साथ ही इन पर 'राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम' और 'आईटी एक्ट' (IT Act) की बेहद सख्त और गैर-जमानती धाराएं भी लगाई गई हैं।
स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप द्वारा जारी की गई इस आधिकारिक सूची में राजस्थान के अलग-अलग जिलों के शातिर अपराधी शामिल हैं, जिनमें सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकारी और निजी कोचिंग संस्थानों के संचालक भी शामिल हैं। इन सभी 15 वांछित आरोपियों का पूरा विवरण इस प्रकार है:
इस सूची का यदि भौगोलिक और प्रशासनिक विश्लेषण किया जाए, तो यह बात साफ हो जाती है कि राजस्थान के सीकर, जालौर, जयपुर और सवाई माधोपुर जैसे जिले इन पेपर लीक माफियाओं के मुख्य केंद्र रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में पहले ही नंबर पर नागेश कुमार का नाम है, जो सीकर की अजीतगढ़ पंचायत समिति में सहायक लेखा अधिकारी जैसे जिम्मेदार सरकारी पद पर बैठा हुआ था।
सरकारी तंत्र के भीतर मौजूद ऐसे अधिकारियों और दिनेश किलका जैसे कोचिंग संचालकों के गठजोड़ के कारण ही ये माफिया परीक्षा प्रणाली को भेदने में सफल हो जाते थे। कोचिंग सेंटरों के जरिए पहले भोले-भाले या अमीर अभ्यर्थियों को फंसाया जाता था और फिर इन प्रभावशाली सरकारी कर्मचारियों की मदद से पेपर को लीक कर करोड़ों रुपयों का लेन-देन किया जाता था। एसओजी की टीमें अब इन सभी आरोपियों के बैंक खातों और संपत्तियों की भी गुप्त जांच कर रही हैं।
Updated on:
02 Jun 2026 11:06 am
Published on:
02 Jun 2026 10:48 am
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